टेक-ऑटो
इंटरनेट पर करीब 40 करोड़ लिंक्डइन यूजर्स का डेटा मात्र 3 हजार रुपये की साधारण कीमत पर बिक रहा है.
डीएनए हिंदी: आज के दौर में इंटरनेट पर्सनल डेटा (Personal Data Leak) की मंडी बन चुकी है. यहां सोशल मीडिया यूज करने के लिए अपनी निजी जानकारी बेफिक्री के साथ शेयर कर देते है लेकिन असल में इंटरनेट पर इस डेटा का व्यापार हो रहा है. इंटरनेट पर एक ऐसी वेबसाइट है जहां आसानी से विश्व के प्रतिष्ठित लोगों का डेटा सार्वजनिक हो रहा है. हालांकि साइबर अपराधियों को बढ़ावा ना देने का ध्यान रखते हुए हम इस खबर में उस वेबसाइट का जिक्र नहीं कर रहे हैं लेकिन इस वेबसाइट पर बिक रहे डेटा को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है.
इंटरनेट की मंडी में घंटों लंबी पड़ताल में सामने आया कि इंटरनेट पर लिंकडिन के 40 करोड़ से ज्यादा कथित यूजर्स के डेटा को एक वेबसाइट 3 हजार रुपये महीने के रेट बेच रही है. इन 40 करोड़ लोगों में टेस्ला के सीईओ और ट्विटर के नए मालिक एलन मस्क (Elon Musk), फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग, ट्विटर के पूर्व सीईओ जैक डोर्सी, ट्विटर के मौजूदा सीईओ पराग अग्रवाल, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला, Adobe के सीईओ शांतनु नारायण, अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस समेत ओला के सीईओ भविश अग्रवाल का नंबर मौजूद है.
इसके अलावा इस वेबसाइट में पेप्सिको की पूर्व सीईओ इंदिरा नूई, UBER इंडिया के प्रमुख प्रभजीत सिंह, RPG ग्रुप के चेयरमैन हर्ष गोयनका, महिंद्रा ग्रुप के प्रमुख आनंद महिंद्रा (Anand Mahindra ) समेत देश-विदेश की कई बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों के प्रमुखों के पर्सनल मोबाइल नंबर और ईमेल सामने आए. यह कभी खत्म न होने वाली लिस्ट थी जिसमें देश-विदेश के बड़े-बड़े सीईओ और बिजनेसमैन थे.
पर्सनल मोबाइल नंबरों और ईमेल की लिस्ट में लिंकडिन के सीईओ जेफ वीनर और लिंकडिन भारत के प्रमुख आशुतोष गुप्ता का भी मोबाइल नंबर और ईमेल था. अब जानना जरूरी था कि क्या जो मोबाइल नंबर और ईमेल इस वेबसाइट पर बेचे जा रहे हैं क्या वो सच में असली है. ऐसे में हमारी टीम ने वेबसाइट पर मौजूद लिंकडिन भारत के प्रमुख आशुतोष गुप्ता के मोबाइल नंबर पर कॉल कर दिया. फोन उठा और ये पूछने पर पता लगा कि नंबर सच में आशुतोष गुप्ता का ही था. आशुतोष को भी नहीं पता था कि उनका नंबर इंटरनेट पर मौजूद है और बिक रहा है.
इंटरनेट पर 40 करोड़ से ज्यादा लोगों का मोबाइल नंबर और ईमेल बेचने वाली कंपनी का दावा है कि उसकी वेबसाइट पर मौजूद सभी नंबर लिंकडिन के यूजर्स के हैं और ये वेबसाइट 100 मोबाइल नंबर प्रतिमाह 3 हजार रुपये में बेचती है. वहीं इस मामले में Linkedin कहना है कि उसके यूजर्स की इजाजत के बिना उनके निजी डेटा के इस्तेमाल को गलत मानता है और इसी साल फरवरी में लिंकडिन ने सिंगापुर की कंपनी Mantheos Ptd. Ltd पर केस भी किया था क्योंकि यह कंपनी लिंकडिन के लाखों यूजर्स के डेटा का गलत इस्तेमाल कर रही थी.
बीते कई वर्षों में लिंकडिन यूजर्स के डेटा के डार्कवेब पर तो बिकने की खबरें आम थीं और कभी लिंकडिन ने लीकेज को माना और कभी नहीं. लेकिन इंटरनेट पर 40 करोड़ से ज्यादा प्रोफेशनल यूजर्स का पर्सनल मोबाइल नंबर एक जगह होना और उसके बिकने को साइबर विशेषज्ञ बड़ा खतरा मान रहे हैं.
देश के जाने-माने साइबर एक्सपर्ट अमित दुबे के मुताबिक 40 करोड़ प्रोफेशनल लोगों का डेटा एक जगह पर बिकना बड़ा खतरा है. कोई भी साइबर अपराधी इस डेटा को खरीदकर इन 40 करोड़ में से कुछ यूजर्स को नौकरी का झांसा देकर मोटी रकम ऐठ सकता है क्योंकि ज्यादातर यूजर्स तो लिंकडिन जैसे प्लेटफार्म का इस्तेमाल नौकरी खोजने के लिए ही करते हैं.
साइबर विशेषज्ञ अमित दुबे के मुताबिक देश-विदेश के बड़े उद्योगपतियों और बड़ी-बड़ी कंपनियों के सीईओ जैसे अधिकारियों को और सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि उनका मोबाइल नंबर और मेल इंटरनेट पर मौजूद है और स्पूफ कॉलिंग के सहारे सरकार का बड़ा अधिकारी या मंत्री बनकर उन्हें ठगने का भी प्रयास हो सकता है.
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लिंकडिन एक अमेरिकी Employment oriented ऑनलाइन सर्विस है जिसके इस समय 200 देशों में 83 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं. इनमें 7 करोड़ से ज्यादा भारतीय भी हैं. ऐसे में आपके लिए विशेषज्ञों की 3 सलाह हैं.-
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