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E100: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने देश में 100 प्रतिशत इथेनॉल ईंधन (E100) को सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स के तहत मंजूरी दे दी है. ये योजना अगर सफल होती है तो भारत के अरबों डॉलर देश के बाहर जाने से बच सकते हैं.
100% Ethanol fuel rule: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार, 13 जून को ये घोषणा की कि भारत ने 100 प्रतिशत इथेनॉल-ब्लेंड वाले ईंधन को पूरी कानूनी मान्यता दे दी है. नितिन गडकरी ने ये घोषणा करते हुए ये भी कहा कि ये कदम फॉसिल फ्यूल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करने के लिए उठाया जा रहा है. भविष्य में एथेनॉल को पेट्रोल का व्यवहारिक विकल्प माना जा रहा है. कई बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां आने वाले समय में एथेनॉल-फ्रेंडली वाहन लॉन्च करने की तैयारी भी कर रही हैं. अगर ये योजना सफल होती है तो भारत को अरबों रुपये का फायदा हो सकता है. आइये जानते हैं कैसे.
100 प्रतिशत इथेनॉल ईंधन (E100) को सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स के तहत मंजूरी देना भारत के ऑटोमोटिव और एनर्जी सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला है. ये इस बात का संकेत है कि अब सरकार सिर्फ पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग तक सीमित नहीं रहेगी. अब देश में पूरी तरह से फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स (FFVs) का बाजार तैयार किया जाएगा जो शत प्रतिशत शुद्ध इथेनॉल पर चल सकेंगे.
फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत हर साल कच्चे तेल (Crude Oil) का आयात करने के लिए लगभग 22 लाख करोड़ खर्च करता है. इससे देश का काफी पैसा बाहर चला जाता है और देश की अर्थव्यवस्था वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव पर निर्भर रहती है. 100 प्रतिशत इथेनॉल ईंधन पर शिफ्ट होने से यह पैसा विदेशी तेल कंपनियों को जाने के बजाय देश के किसानों और शुगर मिलों के पास जाएगा. इसका कारण ये है कि इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्के और बचे हुए अनाज से तैयार किया जाता है.
भारत में ऑटो सेक्टर की कई बड़ी कंपनियां अब बाजार में ऐसे वाहन उतारने की तैयारी में हैं जो इथेनॉल ईंधन से चलेंगे. हीरो मोटोकॉर्प ने Splendor+ और HF Deluxe जैसी बाइकों के फ्लेक्स-फ्यूल वेरिएंट पहले ही प्रदर्शित कर दिए हैं. मारुति सुजुकी ने भी अपनी WagonR का फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल लॉन्च किया है. इनके अलावा टोयोटा, सुजुकी, हुंडई और एमजी (MG) जैसी दिग्गज कंपनियां भी जल्द ही इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियां लॉन्च करने वाली हैं.
100 प्रतिशत इथेनॉल ईंधन को किसी भी पुरानी या सामान्य कार या बाइक में नहीं डाला जा सकता. इसलिए कंपनियां खास फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल बना रही हैं. E100 फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल में जंग-रोधी अलॉय, खास प्लास्टिक-लाइन्ड फ्यूल टैंक और ट्रीटेड रबर सील्स का इस्तेमाल होता है. इसमें एक खास फ्लेक्स-फ्यूल सेंसर होता है जो पहचान लेता है कि टैंक में कितना पेट्रोल है और कितना इथेनॉल और उसी हिसाब से इंजन काम करता है. इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से करीब 30% कम होती है. इस कारण समान दूरी के लिए ईंधन ज्यादा खर्च होगा लेकिन, कीमत में भारी अंतर के कारण वाहन मालिकों के पैसे बचेंगे.