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बंदरों से निजात पाने के लिए Kanpur Central Station पर उठाया गया यह खास कदम, मिल रहा है फायदा

Kanpur Central Railway Station पर बंदरों से निजात पाने के लिए लंगूरों के कटआउट्स लगाए गए हैं.

बंदरों से निजात पाने के लिए Kanpur Central Station पर उठाया गया यह खास कदम, मिल रहा है फायदा
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डीएनए हिंदीः उत्तर रेलवे का कानपुर सेंट्रल स्टेशन देश के बड़े स्टेशनों की सूची में शुमार है. यहां से हर रोज हजारों की संख्या में यात्री आते-जाते हैं. इस स्टेशन पर बंदर की एक बड़ी समस्या हैं, जिस वजह से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. यात्रियों की परेशानी को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने एक खास कदम उठाया है.

कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन के डिप्टी सीटीएम ने विभिन्न प्लेटफार्म्स पर जगह-जगह लंगूरों के कटआउट लगवा दिए हैं. अब इसका फायदा भी दिखाई देने लगा है. दरअसल ऐसा माना जाता है कि लंगूर बंदरों के दुश्मन होते हैं. इसीलिए बंदरों के आतंक से छुटकारा पाने के मकसद से ही कानपुर सेंट्रल स्टेशन प्रशासन की तरफ से प्लेटफार्म्स पर लंगूरों के कटआउट लगाए गए हैं.

यात्रियों को परेशान करते हैं बंदर 
प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में ऐसी व्यवस्था की जाएगी जिससे लंगूरों के कटआउट्स से लंगूरों की आवाज भी आए. ताकी लंगूरों की समस्या से निजात पाया जा सके. इस स्टेशन पर अकसर बंदर यात्रियों को परेशान करते नजर आ जाते हैं. कभी बंदर यात्रियों को दौड़ाते है तो कभी उनका सामान छीन लेते हैं. कई बार बंदर यात्रियों को काट कर घायल भी कर चुके हैं. अबतक बंदरों को प्लेटफार्म से दूर रखने के सारे प्रयास विफल साबित होते रहे हैं.

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कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन के डिप्टी सीटीएम हिमांशु शेखर उपाध्याय ने प्लेटफार्म से बंदरों को भगाने का नया प्लान बनाया है. लंगूर के सामने लाल मुंह वाले बंदर भाग जाते है. उनकी इसी दुश्मनी का फायदा उठाते हुए स्टेशन के डिप्टी सीटीएम ने प्लेटफार्म पर जगह-जगह लंगूर के कटआउट लगवाएं हैं. फिलहाल प्लेटफार्म पर पांच कटआउट लगाए गए हैं. उनका कहना है कि प्लेटफार्म पर यात्री बंदरों से काफी परेशान है. 

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हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि सरकारी विभाग होने के कारण हम यहां असली लंगूर नहीं ला सकते हैं इसलिए हमने लंगूर के कटआउट लगाए गए है. वह आगे कहते हैं कि अभी हमने जहां ऐसे कटआउट लगवाए है वहां पर बंदर कम आ रहे है. अब हम लंगूर के कटआउट में गुर्राने वाली वाइस चिप भी लगाने जा रहे है. इससे पहले वन विभाग की मदद से बंदरों को पकड़ कर दूर जंगलों में भी छोड़ा जा चुका है लेकिन उसका कोई सार्थक फायदा नहीं हुआ. 

(कानपुर से श्याम तिवारी की रिपोर्ट)

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