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कौन हैं 106 साल की 'उड़नपरी' राम बाई, पहले विश्व युद्ध में जन्मी परदादी ने तोड़ा 100 मीटर फर्राटा का रिकॉर्ड, जीते 4 गोल्ड मेडल

Success Story: नातिन को दौड़ता देखकर एथलीट बनने वाली रामबाई 2 साल में दर्जनों मेडल जीत चुकी हैं. उनकी कहानी सुनकर आप हैरान रह जाएंगे.

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कौन हैं 106 साल की 'उड़नपरी' राम बाई, पहले विश्व युद्ध में जन्मी परदादी ने तोड़ा 100 मीटर फर्राटा का रिकॉर्ड, जीते 4 गोल्ड मेडल

Veteran Athlete Rambai

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डीएए हिंदी: Ajab Gajab News- पहला विश्व युद्ध, ये शब्द सुनने में ही आपको कितना पुराना लगता होगा. ऐसे में कोई यदि आपको ये कहे कि पहले विश्व युद्ध के समय जन्मी महिला अब भी ट्रैक पर दौड़ लगाती है. महज दौड़ती ही नहीं बल्कि ऐसा फर्राटा भरती है कि अच्छे-अच्छे जवान भी देखकर हैरान रह जाएं. बात हो रही है हरियाणा के चरखी दादरी जिले की दादी राम बाई की, जिन्होंने 106 साल की उम्र में देहरादून में आयोजित युवरानी महेंद्र कुमारी राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अपनी परफॉर्मेंस से धूम मचा दी है. रामबाई ने ट्रैक एंड फील्ड के फर्राटा इवेंट्स यानी 100 मीटर और 200 मीटर दौड़ के गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिए. इतना ही नहीं दो अन्य इवेंट्स में भी उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर सभी को दंग कर दिया. 106 साल की उम्र में भी रामबाई ने 100 मीटर दौड़ महज 45.40 सेकंड में पूरी की, जो एक नया रिकॉर्ड समय भी है.

104 साल की उम्र में बनी एथलीट, नातिन बनी रोल मॉडल

रामबाई हरियाणा के चरखी दादरी जिले के कादमा गांव की रहने वाली हैं. पहले विश्व युद्ध के दौरान साल 1917 में जन्मी रामबाई ने महज 2 साल पहले 104 साल की उम्र में दौड़ना शुरू किया था. उनकी रोल मॉडल बनी थी उनकी नातिन शर्मिला सांगवान, जो राष्ट्रीय स्तर की एथलीट रही हैं और अब वेटरन एथलेटिक्स में भी हाथ आजमा रही हैं. शर्मिला को दौड़ते देखकर उन्हें भी दौड़ने की इच्छा हुई और वे भी रेस लगाने लगी. शर्मिला उनकी दौड़ देखकर हैरान रह गईं और उन्हें वेटरन इवेंट्स में भाग लेने के लिए प्रेरित किया. इसके बाद इतिहास बन गया, उन्होंने 104 साल की उम्र में गुजरात के वडोदरा में नेशनल ओपन मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पहली ही बार उतरकर दो गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिए थे. इसके बाद रामबाई अब हर इवेंट में पदक जीतकर लौटती हैं. हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी उनके जज्बे के लिए उनकी तारीफ कर चुके हैं.

तीन पीढ़ी एकसाथ उतरती है ट्रैक पर

रामबाई के अलावा उनकी बेटी 70 साल की संतरा देवी और उनकी पोती 42 साल की शर्मिला भी वेटरन एथलेटिक्स में भाग लेने आती हैं. दुनिया उस समय हैरान रह जाती है, जब रामबाई के परिवार की तीन पीढ़ी यानी दादी, बेटी और पोती ट्रैक पर एकसाथ उतरती हैं. हर महीने ही ये तीनों किसी ने किसी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कही न कहीं जाती रहती हैं.

देहरादून में भी जीते चार मेडल

रामबाई ने देहरादून में आयोजित नेशनल एथलेटिक्स में भी 100 मीटर, 200 मीटर दौड़, रिले दौड़, लंबी कूद में भाग लिया. इन चारों ही इवेंट में उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम किए हैं. 100 मीटर दौड़ उन्होंने महज 45.40 सेकंड में पूरी की, जबकि 200 मीटर दौड़ उन्होंने 2 मिनट से भी कम समय में पूरी कर ली. 

यह है दादी की ताकत का राज

रामबाई ने मीडिया को बताया कि वे फिट रहने के लिए रोजाना 5 किलोमीटर दौड़ती हैं. इसके अलावा शुद्ध शाकाहारी डाइट खाने वाली रामबाई रोजाना 250 ग्राम देशी घी और आधा किलो दही खाती हैं. घी का चूरमा खाती हैं. दिन में दो बार 500 मिलीलीटर दूध भी पीती हैं. इसके अलावा नाश्ते में दूध के साथ फलाहार भी करती हैं. वे रात में 9 बजे सो जाती हैं और सुबह सूरज उगने से पहले उठ जाती हैं.

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