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भारत की इस हार पर पूर्व दिग्गज क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने कमेंट किया है.
डीएनए हिंदी: क्रिकेट में कब क्या हो जाए कहा नहीं जा सकता. कभी जीती हुई बाजी हार में बदल जाए और कब हारी हुई बाजी जीत को छीन ले यह सब क्रिकेट की अनिश्चितता पर ही निर्भर है. कुछ ऐसा ही नजारा भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच (IND W vs SA W) महिला विश्व कप (CWC 2022) के मुकाबले में हुआ. वर्ल्ड कप में 'करो या मरो' का मैच खेल रही टीम इंडिया का सपना महज 1 इंच के फासले से टूट गया.
जी हां, टीम इंडिया की सेमीफाइनल की उम्मीदें लास्ट ओवर में धराशायी हो गईं. हुआ यूं कि अंतिम ओवर में साउथ अफ्रीका को जीत के लिए 7 रन की दरकार थी. कप्तान मिताली राज ने अंतिम ओवर दीप्ति शर्मा को दिया. पहली गेंद पर बल्लेबाज त्रिशा चेट्टी ने एक रन लेकर मिगॉन डु प्रीज को स्ट्राइक दे दी. प्रीज रन लेने दौड़ीं तो चेट्टी को हरमनप्रीत ने रनआउट कर दिया. इसके साथ ही भारतीय खेमे में खुशी की लहर छा गई.
पवेलियन लौटने लगी बल्लेबाज लेकिन ये क्या!
अब बारी थी तीसरी बॉल की. इस गेंद पर प्रीज ने एक रन लेकर शबनम इस्माइल को स्ट्राइक दी. चौथी गेंद पर शबनम ने एक रन ले लिया. अब साउथ अफ्रीका को जीत के लिए अंतिम दो गेंदों में तीन रन की दरकार थी. क्रिकेटप्रेमियों की धड़कनें बढ़ने लगीं. दीप्ति ने प्रीज को पांचवीं बॉल डाली तो बल्लेबाज ने इसे मिड ऑन के ऊपर से उठा दिया लेकिन यहां लगी फील्डर हरमनप्रीत कौर ने आसान कैच पकड़कर भारतीय खेमे की खुशी बढ़ा दी, बल्लेबाज पवेलियन लौटने लगी लेकिन ये क्या!
यह खुशी कुछ ही देर में काफूर हो गई क्योंकि अंपायर ने इसे नो बॉल करार दे दिया. इस नो बॉल के साथ ही भारतीय टीम के हाथ से जीत भी निकल गई. अगली दों गेंदों पर शबनम इस्माइल और प्रीज ने एक एक रन लेकर टीम को जीत दिला दी. वर्ल्ड कप में आखिरी उम्मीद पर टिकी भारतीय टीम इससे काफी निराश नजर आई.
It wasn't just the no ball which cost India the game today but sometimes an inch costs moments that takes decades to achieve and are possibly once in a lifetime achievement for many players. Disappointing end to India's campaign #IndvSA #cwc22 pic.twitter.com/2DzerovJD1
— Virender Sehwag (@virendersehwag) March 27, 2022
सहवाग ने किया ट्वीट
भारत की इस हार पर पूर्व दिग्गज क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने ट्वीट कर कहा, यह सिर्फ नो बॉल नहीं थी जिसने आज भारत को खेल की कीमत चुकाई है. कभी-कभी एक इंच की कीमत वाले क्षणों को हासिल करने में दशकों लग जाते हैं और संभवतः कई खिलाड़ियों के लिए यह जीवनभर की उपलब्धि होती है. भारत के अभियान का निराशाजनक अंत...