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Ravindra Jadeja ने टेस्ट क्रिकेट को लेकर बड़ी बात की है. जडेजा ने खुलासा किया है कि उन्होंने कभी टेस्ट क्रिकेट खेलने की उम्मीद नहीं की थी, उनका मानना था कि वाइट बॉल क्रिकेट ही उनकी असली ताकत है.
अनुभवी भारतीय ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने अपने एक खुलासे से तमाम क्रिकेट प्रेमियों को चौंका दिया है. जडेजा ने खुलासा किया है कि उन्होंने कभी टेस्ट क्रिकेट खेलने की उम्मीद नहीं की थी, उनका मानना था कि वाइट बॉल क्रिकेट ही उनकी असली ताकत है.टेस्ट पर बात करते हुए जडेजा ने कहा कि, जब मैंने शुरुआत की, तो मुझे एहसास नहीं था कि मैं भारत के लिए इतने सारे टेस्ट मैच खेलूंगा. मैंने हमेशा सोचा कि सफ़ेद गेंद वाला क्रिकेट ही मेरी खूबी है और मैंने खुद को यहीं स्थापित करने का लक्ष्य रखा.'
जडेजा के अनुसार, 'शुरू में, मुझे लगा कि टेस्ट क्रिकेट थोड़ा लंबा है और केवल बहुत ही समर्पित खिलाड़ी ही इसमें अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं. यह मेरी शुरुआती मानसिकता थी.' जडेजा ने महेंद्र नामक दो महत्वपूर्ण व्यक्तियों को अपनी जिंदगी के लिए खासा अहम मन और कहा कि इन दो लोगों, उनके बचपन के कोच महेंद्र सिंह चौहान और भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने उनकी क्रिकेट यात्रा में महत्वपूर्ण प्रभाव डाला.
रविचंद्रन अश्विन द्वारा होस्ट किए गए पॉडकास्ट में, जडेजा ने खुलासा किया कि दोनों पुरुषों ने उनके करियर के विभिन्न चरणों में निर्णायक भूमिका निभाई.
जडेजा के मुताबिक, 'मैंने जामनगर में 'क्रिकेट बंगला' नामक मैदान पर खेलना शुरू किया था, जब मैं लगभग 8-9 साल का था. मेरे कोच, जो अभी भी उसी मैदान पर प्रशिक्षण देते हैं, बिहार से हैं और उनका नाम महेंद्र सिंह चौहान है. मैंने माही भाई से भी कहा है कि मेरी क्रिकेट यात्रा दो महेंद्रों - महेंद्र सिंह चौहान और महेंद्र सिंह धोनी के इर्द-गिर्द घूमती है.
जडेजा ने कम उम्र से ही अपने विकास का श्रेय पूर्व पुलिस अधिकारी चौहान को दिया.
'वह एक पुलिस अधिकारी थे और उनका मानना था कि एक खिलाड़ी को पूरी तरह से फिट रहना चाहिए. उनका मानना था कि बल्लेबाजी और गेंदबाजी को मैनेज किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए बहुत दौड़ना पड़ता है. मेरी फिटनेस और फील्डिंग स्किल्स का श्रेय जामनगर के आसपास 15-20 किलोमीटर दौड़ने को दिया जा सकता है.'
जब धोनी को एक शब्द में वर्णित करने के लिए कहा गया, तो जडेजा ने धोनी की तारीफ करते हुए जवाब दिया कि, 'उनकी महानता का वर्णन करने के लिए कोई एक शब्द नहीं है. वह सभी से ऊपर हैं.'
जडेजा और अश्विन मैदान पर धोनी की कई रणनीतियों के केंद्र में थे, चाहे वह भारत के लिए हो या आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए.
इस बातचीत में भारत के पूर्व कप्तान विराट कोहली के बारे में भी चर्चा हुई, जिसमें जडेजा ने टेस्ट क्रिकेट में कोहली की आक्रामक मानसिकता को एक महत्वपूर्ण पहलू बताया.
जडेजा ने कहा, 'यह उनका सकारात्मक दृष्टिकोण था. खासकर टेस्ट में, जो उन्हें दूसरों से अलग करता था. विराट हमेशा चाहते थे कि टीम टेस्ट मैच में 20 विकेट ले. उन्होंने कभी हार नहीं मानी, चाहे वह तीन घंटे का सत्र हो या 45 ओवर बाकी हों, उनका लक्ष्य हमेशा विपक्षी टीम के सभी 10 विकेट लेना होता था. '
बता दें कि कोहली ने हाल ही में सबसे लंबे प्रारूप से संन्यास लिया, उन्होंने अपने टेस्ट करियर का समापन 123 मैचों में 46.85 की औसत से 9,230 रन बनाकर किया, जिसमें 30 शतक और 31 अर्द्धशतक शामिल हैं.