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Ferran Torres India Connection: फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में अर्जेंटीना के खिलाफ ऐतिहासिक विनिंग गोल दागकर फेरान टोरेस रातों-रात दुनिया के सबसे चर्चित फुटबॉलर बन गए हैं.
स्पेन के स्टार फुटबॉलर फेरान टोरेस का नाम हमेशा-हमेशा के लिए फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में दर्ज हो गया है. सोमवार (भारतीय समयानुसार) रात अर्जेंटीना के खिलाफ हुए फाइनल मैच के 106वें मिनट में उनके बाएं पैर से निकले एक दमदार शॉट ने इतिहास रच दिया. दुनिया उन्हें हमेशा उस खिलाड़ी के रूप में याद रखेगी जिसने स्पेन को दूसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बनाने वाला विनिंग गोल दागा था.
26 साल का यह फॉरवर्ड खिलाड़ी वैसे तो बार्सिलोना क्लब के लिए खेलता है, लेकिन अब उनके खाते में अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल के दो सबसे बड़े खिताब आ चुके हैं. मगर बहुत कम लोग यह बात जानते हैं कि स्पेन के इस नए हीरो का भारत से एक बेहद अनोखा और पुराना कनेक्शन है.
आज जिस खिलाड़ी के गोल ने लियोनेल मेसी जैसी महान शख्सियत की आंखों में आंसू ला दिए, उसकी प्रतिभा की पहली झलक करीब नौ साल पहले भारत में ही देखी गई थी. साल 2017 में जब भारत में फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप का आयोजन हुआ था, तब 17 साल के युवा फेरान टोरेस स्पेनिश टीम का हिस्सा बनकर भारत आए थे. उस टूर्नामेंट में उन्होंने अपनी टीम को सिल्वर मेडल जिताने में बड़ी भूमिका निभाई थी.
उस वक्त वालेंसिया की एकेडमी में सीख रहे फेरान स्पेन की उस प्रतिभावान टीम के सबसे बड़े स्टार्स में से एक थे. राइट-विंगर के तौर पर खेलते हुए उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में दो गोल दागे और दो गोल करने में मदद की थी. हालांकि, कोलकाता में खेले गए फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड ने स्पेन को 5-2 से हरा दिया था, लेकिन भारतीय फैंस ने तभी समझ लिया था कि इस लड़के में कुछ खास है.
कोच्चि के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम और कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने उनके लाजवाब खेल को बेहद करीब से देखा था. खास बात यह है कि 2026 की इस वर्ल्ड चैंपियन स्पेनिश टीम में फेरान के अलावा एक और खिलाड़ी हैं जिनका भारत से नाता रहा है. बार्सिलोना में उनके साथी और टीम के सेंटर-बैक एरिक गार्सिया भी 2017 की उस अंडर-17 टीम का हिस्सा थे. अर्जेंटीना के खिलाफ इस फाइनल मैच में एरिक गार्सिया ने भी 21 मिनट तक मैदान पर अपना दम दिखाया.
क्लब लेवल पर फेरान टोरेस को अक्सर उनकी खराब फिनिशिंग और फॉर्म में उतार-चढ़ाव के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है. लेकिन मैदान पर उनकी पोजिशनिंग यानी सही समय पर सही जगह मौजूद रहने की कला लाजवाब है, और फाइनल मैच में यही खूबी उनके काम आई.
मैच के एक्स्ट्रा टाइम में जब निको विलियम्स का एक हेडर आया, तो वहां मुस्तैद खड़े टोरेस ने बिना एक पल गंवाए रिबाउंड पर एक जोरदार हाफ-वॉली शॉट खेला, जो सीधे नेट के ऊपरी हिस्से में जा घुसा. इस बार उनकी फिनिशिंग इतनी सटीक थी कि विरोधी गोलकीपर के पास कोई मौका नहीं था. इस चमत्कारी गोल के बदले उन्हें फाइनल मैच में 'प्लेयर ऑफ द मैच' का अवॉर्ड मिला.
इसके साथ ही वह महान फुटबॉलर एंड्रेस इनिएस्ता के क्लब में शामिल हो गए हैं. स्पेन के इतिहास में इनिएस्ता के बाद फेरान टोरेस ही इकलौते ऐसे खिलाड़ी बने हैं जिन्होंने वर्ल्ड कप फाइनल में विनिंग गोल दागा है. आज भले ही वह बार्सिलोना के कैंप नाउ स्टेडियम में एक लाख से ज्यादा फैंस के सामने खेलते हों, लेकिन खचाखच भरे स्टेडियम में खेलने का उनका पहला अनुभव भारत के कोच्चि और कोलकाता के मैदानों पर ही हुआ था.
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