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72 साल बाद क्यों बदल जाएगी मकर संक्रांति की तारीख? जनवरी में इस तारीख पर हर साल होगी खिचड़ी, नहीं रहेगा कोई कंफ्यूजन

मकर संक्रांति कुछ लोग आज 14 जनवरी तो कुछ कल यानी 15 जनववरी को मनाएंगे. ऐसा कंफ्यूज तिथि की हानि या पंचांग में हेर-फेर से होता है लेकिन क्या आपको पता है कि 72 साल बाद मकर संक्रांति की डेट फिक्स हो जाएगी और जनवरी में इसी खास दिन संक्रांति होगी.

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72 साल बाद क्यों बदल जाएगी मकर संक्रांति की तारीख? जनवरी में इस तारीख पर हर साल होगी खिचड़ी, नहीं रहेगा कोई कंफ्यूजन

Why will the date of Makar Sankranti change after 72 years?

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हिंदू धर्म के अधिकांश त्योहारों की तारीख को लेकर लोगों में भ्रम कि स्थिति रहती है. कई बार 2 दिन त्योहार पड़ते हैं ऐसे में ये कंफ्यूजन बना रहता है कि त्योहार का सबसे शुभ दिन कौन सा है. आज 14 जनवरी दिन बुधवार को कई लोग मकर संक्रांति मना रहे हैं और सदियों से मनाते आ रहे हैं लेकिन कई बार संक्राति 15 जनवरी को होती है जैसा इस बार है. 

क्योंकि सूर्य धनु राशि से मकर राशि में आज यानी 14 जनवरी को रात 9 बजे गोचर करेगा ऐसे में हिंदू धर्म के अनुसार जो त्योहार की तिथि रात में होती है वह अगले दिन सूर्योदय के बाद होने मनाई जाती है. हिंदू धर्म में हर त्योहार सूर्योदय के साथ शुरू होता है. इसलिए इस बार संक्रांति यानी खिचड़ी 15 जनवरी को है.

लेकिन आने वाले 54 साल में क्यों और किस दिन होगी संक्रांति 

विज्ञान और खगोल विज्ञान के अनुसार मकर संक्रांति की तिथि हर 54 से 72 सालों में 14 जनवरी से खिसक कर 15 जनवरी हो जाए गी और संक्रांति का एक दिन ये बढ़ना पूरी तरह से वैज्ञानिक आधार पर तय हुआ है.

पृथ्वी के घूमने की गति धीमी होना है वजह

पृथ्वी अपनी धुरी पर थोड़ी झुकी हुई है और धीमी गति से वृत्ताकार गति में घूमती है, मानो चक्कर लगा रही हो. खगोल विज्ञान में इसे विषुवों का अग्रगमन (प्रीसेशन ऑफ द इक्विनॉक्स) कहा जाता है. इस प्रक्रिया के कारण, पृथ्वी की धुरी हर 72 वर्षों में 1 डिग्री खिसक जाती है.

72 वर्षों में 1 दिन का अंतर

खगोलीय गणनाओं के अनुसार, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तो उसे मकर संक्रांति कहते हैं. पृथ्वी की धीमी गति के कारण, सूर्य का मकर राशि में प्रवेश प्रत्येक 72 वर्षों में लगभग 20 मिनट विलंबित हो जाता है. यह समय संचय होता है और लगभग 54 से 72 वर्षों के बाद पूरे 24 घंटे यानी एक दिन का अंतर हो जाता है. या तो हर दिन को 25 घंटे का माना जाएगा या एक दिन की बढ़ोतरी होगी.
 
भविष्य में क्या होगा?

वर्तमान में हम 14 या 15 जनवरी को संक्रांति मनाते हैं. हालांकि, खगोलविदों के अनुसार, वर्ष 2080 तक मकर संक्रांति स्थायी रूप से 15 जनवरी को ही पड़ेगी और वर्ष 3246 तक यह तिथि बदलकर 1 फरवरी हो जाएगी.

लीप ईयर का भी होगा प्रभाव

हर चार साल में आने वाला लीप ईयर होता है जिसके कारण संक्रांति 14 या 15 जनवरी को पड़ती है. हालांकि, पृथ्वी की धुरी में बदलाव के कारण आने वाले 54 से 72 साल में यह परिवर्तन एक स्थायी परिवर्तन हो जाएगा.
 
उत्तरायण और मकर संक्रांति

सूर्य 21-22 दिसंबर को उत्तर दिशा की ओर बढ़ना शुरू करता है. यानी सूर्यदेव उत्तरायण होते है. भारतीय पंचांग 'निरायन' प्रणाली पर आधारित होने के कारण हम सूर्य के राशि में प्रवेश करने को महत्व देते हैं जो माना जाता है कि 14 जनवरी को होता है.

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