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Lord Shri Krishna: श्रीकृष्ण को क्यों कहा जाता था रणछोड़, जानें कैसे पड़ा भगवान का ये नाम

भगवान श्रीकृष्ण को यह नाम क्यों दिया गया. कैसे भगवान श्रीकृष्ण का नाम रणछोड़ पड़ा. इस नाम का क्या अर्थ है.

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Lord Shri Krishna: श्रीकृष्ण को क्यों कहा जाता था रणछोड़, जानें कैसे पड़ा भगवान का ये नाम
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Lord Shri Krishna Name Ranchod: भगवान श्रीकृष्ण के कई सारी रानियां होने के साथ ही उनके कई सौ नाम थे. भगवान श्रीकृष्ण के 108 नाम थे. भगवान के ये सभी नाम उनके चरित्र को परिभाषित करते हैं. इन्हीं में भगवान का एक नाम रणछोड़ है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण को यह नाम क्यों दिया गया. कैसे भगवान श्रीकृष्ण का नाम रणछोड़ पड़ा. इस नाम का क्या अर्थ है. आइए जानते हैं भगवान के रणछोड़ नाम पड़ने के पीछे की कहानी क्या है...

यह है रणछोड़ नाम का अर्थ 

भगवान श्रीकृष्ण के रणछोड़ नाम का अर्थ भी बताया गया है. दरअसल रण छोड़ अलग अलग दो शब्दों से मिलकर बना है. इसमें रण जिसका अर्थ युद्ध है. वहीं छोड़ का अर्थ है छोड़ना. दोनों शब्दों को मिलाकर रणछोड़ बनता है. इसका अर्थ है कि वह जो युद्ध के मैदान से भाग गया हो. 

नाम के पीछे है ये एक दिलचस्प कहानी

कंस की मृत्यु के बाद, मगध के शासक उसके ससुर जरासंध ने श्रीकृष्ण से बदला लेने की कसम खाई. जरासंध ने सत्रह बार मथुरा पर हमला किया, लेकिन हर बार श्रीकृष्ण ने उसे हरा दिया. इसलिए, जरासंध ने यवन राजा कालयवन के साथ गठबंधन किया. कालयवन को भगवान शिव से वरदान मिला था कि युद्ध के मैदान में वह अपराजेय रहेगा.

भगवान श्रीकृष्ण ने शहर का किया निर्माण

श्री कृष्ण ने अपने लोगों की रक्षा के लिए द्वारका नामक एक दुर्जेय शहर का निर्माण किया. यहां उन्होंने मथुरा के लोगों को पहुंचाया. मथुरा से अपने लोगों को द्वारका ले जाने के बाद भगवान श्री कृष्ण मथुरा लौट आए. कालयवन ने अपनी विशाल यवन सेना के साथ मथुरा को घेर लिया. इस पर श्रीकृष्ण को एहसास हुआ कि यवनों की संख्या उनसे कहीं ज़्यादा है, इसलिए उन्होंने कालयवन को द्वंद्वयुद्ध के लिए चुनौती देने का फैसला किया, लेकिन श्रीकृष्ण युद्ध के मैदान से भाग गए और कालयवन को उस गुफा में ले गए जहाँ त्रेता युग के महान राजा मुचुकुंद थे.

त्रेता युग के महान राजा था मुचुकुंद

मुचुकुंदर महान राजा होने के साथ ही असुरों के साथ एक महाकाव्य युद्ध में देवताओं की सहायता करने के बाद हज़ारों वर्षों की गहरी नींद में थे. मुचुकुंद को भगवान इंद्र ने वरदान दिया था कि जो कोई भी उनकी नींद में खलल डालने की हिम्मत करेगा, वह जलकर राख हो जाएगा, जब श्रीकृष्ण गुफा में पहुंचे तो उन्होंने मुचुकुंद को अपने पीले दुपट्टे से ढक दिया. कालयवन ने उसे कृष्ण समझकर लात मारी, जिससे मुचुकुंद की नींद में खलल पड़ी. वह जलकर राख हो गया.
 

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