धर्म
उत्तर भारत में उनके नाम पर एक त्योहार हुआ करता था जिसे "इंद्रोत्सव" कहा जाता था. लेकिन सर्वोच्च देवता के रूप में भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र की सभी पूजाएँ बंद करा दी. "इंद्रोत्सव" की जगह गोपोत्सव, होली और रंगपंचमी प्रमुख त्योहार बन गए.
Inder Dev Puja: हिंदू धर्म के 33 करोड़ कोटि देवी देवता हैं. इन सभी का राजा इंद्र देव को माना जाता है. सभी देवी देवताओं की एक अलग पदमी होती है. उनकी पूजा अर्चना करने साथ ही देश भर में अलग अलग मंदिर हैं, लेकिन इंद्रदेव का न तो कहीं मंदिर है और न ही पूजा की जाती है. कभी सोचा है कि ऐसा क्यों है. इसके पीछे की वजह इंद्र देव के काम और घमंड होना है. एक मन्वंतर में अलग-अलग इंद्र, सप्तर्षि, अंशावतार, मनु होते हैं. 14 मन्वंतरों में 14 इंद्र होते हैं, जिन्हें यज्न, विपश्चित, शीबि, विधु, मनोजव, पुरंदर, बलि, अद्भुत, शांति, विश, रितुधाम, देवास्पति और सुचि कहा जाता है.
सभी हिंदू देवताओं की तरह इंद्र के भी कई नाम हैं. उन्हें सुरेश, सुरेंद्र, देवेंद्र, देवेश, शचीपति, वासव, सुरपति, शक्र, पुरंदर, देवराज इत्यादि कहा जाता है. इंद्र-धनुष (इंद्रधनुष), इंद्र-जाल (एक मायावी जाल), इंद्रिया (इंद्रियाँ) जैसे शब्दों की उत्पत्ति इंद्र से हुई है. वे बारिश, बादल, गरज-तूफान, बिजली और इंद्रधनुष के देवता हैं. उनकी पत्नी का नाम इंद्राणी है. सभी देवताओं के राजा होने के बावजूद उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में चित्रित किया जाता है जो बुराइयों से भरा हुआ है. वे घमंड और कामवासना से भरे रहे. वे तपस्वियों को उनके एकांतवास से बाहर निकालने के लिए अप्सराएँ भेजते थे. अश्वमेध यज्ञ से घोड़े चुराते थे.
समुद्र मंथन में मिले 14 रत्नों में से एक ऐरावत था, जो चार बड़े हाथी दांत वाला शानदार सफेद हाथी था. इंद्र इसी ऐरावत पर सवार होते हैं, जिन्हें इंद्र-हस्ती या इंद्र-कुंजर भी कहा जाता है. इंद्र के हथियार को वज्र कहा जाता है, जो एक घातक हथियार है. ऋग्वेद के तीसरे मंडल में इंद्र की सर्वोच्च शक्तियों का वर्णन है. उनकी युद्ध कला बेजोड़ है और यहां तक कि पृथ्वी के आर्यों ने भी उन्हें इसके लिए अपना रणनीतिक नेता माना था. उनके पास 100 से ज़्यादा विशेष शक्तियां थीं. इंद्र के 40 से ज़्यादा नाम उनकी शक्तियों का वर्णन करते हैं. वरुण जहां शांति के देवता हैं, वहीं इंद्र युद्ध के देवता थे.
हिंदू उनकी पूजा नहीं करते! लेकिन ऐसा हमेशा से नहीं था. उत्तर भारत में उनके नाम पर एक त्योहार हुआ करता था जिसे "इंद्रोत्सव" कहा जाता था. लेकिन सर्वोच्च देवता के रूप में भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र की सभी पूजाएँ बंद करा दी. "इंद्रोत्सव" की जगह गोपोत्सव, होली और रंगपंचमी प्रमुख त्योहार बन गए. श्रीकृष्ण ने कहा था कि गोवर्धन पर्वत हमें उस देवता (इंद्र) से अधिक जीवन और स्फूर्ति देता है जो हमें धमकाता है. इसलिए "इंद्रोत्सव" की जगह यह अधिक उपयुक्त होगा कि हम "गोपोतासव" मनाएँ, जो गोवर्धन पर्वत का त्योहार है. बताया जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण के इस कदम से इंद्र इतने क्रोधित हुए कि उन्होंने ब्रज में प्रलयकारी वर्षा कर दी. इस पर श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों के इसके नीचे बुलाकर इंद्र के प्रलय से बचा लिया. इससे इंद्र का घमंड टूट गया. उसके बाद से इंद्र की जगह पर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू हुई.
Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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