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Male Priests in Temples: मंदिरों में केवल पुरुष पुजारी ही क्यों होते हैं? जान लें इसके पीछे का कारण

मंदिरों में आपने पुजारी के तौर पर हमेशा पुरुषों को देखा होगा. इसके पीछे क्या कारण है कभी जाना है आपने. हालांकि ईशा फाउंडेशन के कुछ मंदिरों में अब महिला पुजारी भी रखी जा रही हैं लेकिन अब भी अधिकतर मंदिरों में पुरुष ही पुजारी होते हैं.

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Male Priests in Temples: मंदिरों में केवल पुरुष पुजारी ही क्यों होते हैं? जान लें इसके पीछे का कारण

मंदिरों में क्यों होते हैं आदमी ही पुजारी?

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प्राचीन काल से ही मंदिरों में पुरुषों को पुजारी नियुक्त करने की परंपरा रही है. धीरे-धीरे पुरुषों को भी समान भूमिका निभाने का अवसर मिल रहा है. इसके पीछे सामाजिक और ऐतिहासिक कारण भी है. 

धार्मिक कारण
ऐसा माना जाता है कि पुजारी भगवान और भक्तों के बीच मध्यस्थ का काम करता है. पुजारी को वेदों और अन्य धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान होना चाहिए तथा पूजा-अर्चना के अनुष्ठानों से भी परिचित होता है, इन सब से बड़ा कराण ये है कि महिलाओं को महीने के कुछ दिन महावारी होती है ऐसे में मंदिर की पूजा-अर्चना प्रभावित होती है. वहीं पुरुषों के साथ ये दिक्कतें नहीं होती हैं..

सामाजिक कारण
प्राचीन काल में महिलाओं को घर की चारदीवारी तक ही सीमित रखा जाता था. उन्हें पढ़ने या शिक्षा प्राप्त करने की अनुमति नहीं थी. इसीलिए वे पुजारी बनने के योग्य नहीं थे.

ऐतिहासिक कारण
भारत पर कई बार विदेशी ताकतों ने आक्रमण किया. इन आक्रमणों के दौरान मंदिरों को लूटा गया और नष्ट कर दिया गया. पुजारी भी मारे गये. इसीलिए सुरक्षा के लिए एक आदमी को पुजारी के रूप में रखा जाता था और धीरे-धीरे ये परंपरा में बदल गया. 

हालांकि, आज महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करने की अनुमति है. वह पुजारी बनने के लिए भी योग्य है. दरअसल, मंदिरों पर सदियों से पुरुषों का वर्चस्व रहा है. पुजारी के रूप में केवल पुरुषों को ही मंदिरों में पूजा करने का अधिकार था. लेकिन बदलते समय के साथ समाज में बदलाव आया है और महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार मिलने लगे हैं.

आजकल कुछ विशेष मंदिरों में महिलाएं पुजारी का काम भी करती हैं. दक्षिण भारत के कुछ मंदिरों में महिलाएं मुख्य पुजारी हैं और वे मंदिर की सभी गतिविधियों का प्रबंधन करती हैं.

महिलाओं को पुजारी के रूप में देखना एक सुंदर और प्रेरणादायक अनुभव है. यह परिवर्तन धीरे-धीरे हो रहा है लेकिन यह निश्चित रूप से सही दिशा में है. आने वाले समय में हम मंदिरों में पुजारियों के रूप में अधिक संख्या में महिलाओं को देखेंगे.
 

Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.)  

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