धर्म
Signs of a woman who hates men: आइए जानें कब और कौन सा योग कुंडली में हो तो पति-पत्नी पर जान का खतरा रहता है और कौन सा योग रिश्ते में खतरा या दरार पैदा कर सकता है.
Murder combination is formed after marriage: आजकल शादी की हालत ऐसी हो गई है कि शादी तय करना भी डरावना लगता है. लोगों का भरोसा शादी से डगमगा रहा है. कुंडली मिलान के बाद भी शादी में दिक्कतें आ रही हैं. कई जगहों पर तो पति-पत्नी एक-दूसरे की जान लेते नजर आ रहे हैं. आइए देखें कुंडली में कौन सा योग है जो पत्नी के रिश्ते में खतरा या दरार पैदा कर सकता है.
आजकल सोशल मीडिया पर शादी के बाद पत्नी द्वारा पति की हत्या करने की घटनाएं देखने को मिल रही हैं. इस वजह से अब लोग अरेंज मैरिज करते हुए भी डरने लगे हैं. पहले लोग कुंडली मिल जाने पर बिना किसी झिझक के शादी कर लेते थे. हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए अब सिर्फ कुंडली मिलाना ही काफी नहीं है, बल्कि व्यक्ति के स्वभाव, व्यवहार और विशेषताओं को भी देखना जरूरी है.
वराहमिहिर के बृहत्संहिता में क्या लिखा है
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पांचवीं शताब्दी के मेदिनी ज्योतिष ग्रंथ बृहत्संहिता में स्त्री द्वारा पति की हत्या करने के बारे में कुछ विवरण दिए गए हैं. और ऐसी महिलाओं की मानसिक विशेषताओं का भी इसमें विस्तार से वर्णन किया गया है. आइए देखें कि शादी के बाद कुंडली में कब खतरा होता है. राजा विक्रमादित्य के नौ रत्नों में से एक आचार्य वराहमिहिर द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रंथ 'बृहत्संहिता' के 77वें अध्याय के 'स्त्री-पुरुष-समागम-अध्याय' के प्रथम दो श्लोकों में उस समय के राजाओं की हत्या की कुछ घटनाओं का वर्णन है. यह कृत्य उनकी पत्नियों ने किया था.
वराहमिहिर के अनुसार 'राजा विदूरथ की हत्या उनकी विरही पत्नी ने अपनी चोटी के बालों में शस्त्र छिपाकर की थी. काशी के राजा को उनकी रानी ने विषैला पेय पिलाकर मार डाला था.' कहते हैं कि विरक्त स्त्री अर्थात प्रेम न करने वाली स्त्री घातक हो सकती है. आचार्य वराहमिहिर ने प्रेम से परिपूर्ण स्त्री की प्रशंसा की है तथा विरक्त स्त्रियों के लक्षणों का भी विस्तार से वर्णन किया है.
जो महिला पुरुषों से प्यार नहीं करती, उनके लक्षण ऐसे होते हैं
आचार्य वराहमिहिर के अनुसार ये उन स्त्रियों के लक्षण हैं जो पुरुषों से प्रेम नहीं करतीं. वे दूर से अपने पति को आते देखकर क्रोधित हो जाती हैं. वे जानबूझकर अपने पति की उपेक्षा करती हैं. वे अपने पति की अच्छाइयों को भी याद नहीं रखतीं. वे अपने पति को देखकर डर जाती हैं और उदासीनता की भावना में लिप्त हो जाती हैं. यदि उन्हें बहुत सारा धन या उपहार भी दिया जाए तो भी वे खुश नहीं होतीं. वे अपने पति से कठोरता से बात करती हैं और यदि उनका पति उन्हें छू भी लेता है तो वे दूर चली जाती हैं. वे अपने क्रोधित पति को कभी शांत करने का प्रयास नहीं करतीं.
ऐसे में जातक जीवनसाथी का बन जाता है शत्रु
ज्योतिष की दृष्टि से कुंडली में जीवनसाथी के शत्रु बनने के कुछ योग हमें जातक तत्व और जातक पारिजात जैसे ग्रंथों में मिलते हैं. यदि सप्तमेश छठे भाव में हो और उस पर शनि और मंगल जैसे अशुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो जातक का जीवनसाथी उसका शत्रु बन जाता है. यदि सप्तम भाव में पाप ग्रह (शनि, मंगल, राहु या केतु) हों और सप्तम भाव का स्वामी पाप ग्रह की राशि में या पाप ग्रह की नवांश में हो तो जातक की पत्नी दुष्ट हो सकती है. जैमिनी ज्योतिष के अनुसार यदि अंधकार कारक ग्रह ज्ञान कारक ग्रह से युक्त हो और पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो व्यक्ति की पत्नी भी उसकी शत्रु हो सकती है. बृहत पाराशर होरा शास्त्र के स्त्री कुंडली अध्याय के अनुसार यदि कुंडली में विषकन्या योग हो तो स्त्री के दांपत्य जीवन में कलह हो सकती है.
(Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है. इस पर अमल करने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें.)
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