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Rangbhari Ekadashi 2025: किस दिन है रंगभरी एकादशी? इस दिन क्यों खेली जाती है भगवान संग होली

रंगवाली यानी रंगभरी एकादशी मार्च में किस दिन पड़ रही है और इस एकादशी पर गवान विष्णु के साथ-साथ महादेव और उनकी पत्नियों को भी रंग लगाने का रिवाज है. चलिए जानें रंग भरी एकादशी से जुड़ी जानकारी.

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Rangbhari Ekadashi 2025: किस दिन है रंगभरी एकादशी? इस दिन क्यों खेली जाती है भगवान संग होली

कब है रंगभरी एकादशी

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फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंगभरी एकादशी या आमलाकी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. आमतौर पर एकादशी वर्ष भर में समय-समय पर आती है. लेकिन, रंगवाली एकादशी को विशेष माना जाता है. क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ महादेव और देवी पार्वती की भी पूजा की जाती है. इस दिन व्रत रखने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस एकादशी का व्रत करने से जीवन से दुख दूर रहते हैं. इस एकादशी पर क्या करना चाहिए और कब है रंग भरी एकादशी चलिए जानें. 
 
रंगभरी एकादशी कब है?

एकादशी तिथि की शुरुआत 9 मार्च को 8 बजकर 15 मिनट से होगी. समापन अगले दिन यानी 10 मार्च 08 बजकर 05 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार 10 मार्च को ही रंग भरी एकादशी का व्रत रखा जाएगा.

क्यों होती हैं ये एकादशी रंगों वाली

रंगभरी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी पर अबीर अर्पण करना चाहिए. विशेष कर काशी में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अबीर-गुलाल से ही की जाती है. कथा के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के पश्चात पहली बार दोनों जब कैलाश आए थे तो शिवगण ने अबीर-गुलाल से ही उनका स्वागत किया था. रंगभरी एकादशी के दिन काशी विश्वनाथ में विशेष पूजा की जाती है. लोग दूर-दूर से होली खेलने पहुंचते हैं. रंगभरी एकादशी के दिन शिवलिंग पर अबीर अवश्य अर्पण करना चाहिए.

रंग भरी एकादशी पर करें ये टोटका
इस दिन गुलाब जल में चंदन और केसर मिलाकर तिलक लगाएं. ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. ज्योतिष शास्त्र में भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और रंग भरी एकादशी पर आर्थिक समृद्धि प्राप्त करने के लिए कुछ उपाय बताए गए हैं. इस दिन पान के पत्ते पर रोली और कुमकुम से श्री लिखें. इसके बाद इसे भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें. पूजा के बाद इस पत्ते को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रख दें. लाभ शीघ्र ही दिखाई देंगे.

एकादशी पर करें इस मंत्र का जाप

भगवान विष्णु के मूल मंत्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' की 21 माला जप करें. यदि 21 माला जपना संभव न हो तो कम से कम 3 माला जपें. इस उपाय को करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भविष्य में सुख-शांति की प्राप्ति होती है.
 
संतान प्राप्ति के लिए आप जादू भी कर सकते हैं. इस दिन संतान गोपाल मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें: ॐ श्री कृष्णाय पवित्राय पवित्राय

Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.) 

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