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Mohini Ekadashi: मोहिनी एकादशी कब है? जानें शुभ मुहूर्त और इस विधि से करें भगवान विष्णु की पूजा

शुक्ल एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के मोहिनी रूप की पूजा करने से भक्तों को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है. जानें कब है मोहिनी एकादशी, शुभ मुहूर्त, महत्व

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Mohini Ekadashi: मोहिनी एकादशी कब है? जानें शुभ मुहूर्त और इस विधि से करें भगवान विष्णु की पूजा

Mohini Ekadashi  

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मोहिनी एकादशी भगवान विष्णु की प्रिय एकादशी तिथियों में से एक है. मोहिनी एकादशी व्रत 8 मई, गुरुवार को रखा जाएगा. मोहिनी एकादशी वर्ष की प्रमुख एकादशी तिथियों में से एक मानी जाती है. पूरे विधि-विधान और व्रत के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी लाभ मिलते हैं. यह व्रत वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है और यह भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार से जुड़ा हुआ है. ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को पूरे संकल्प के साथ करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और सुख-समृद्धि बढ़ती है. तुम्हें भी मोक्ष प्राप्त हो. आइए जानते हैं मोहिनी एकादशी व्रत का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में.
 
मोहिनी एकादशी शुभ मुहूर्त
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी जिसे मोहिनी एकादशी कहा जाता है. यह 8 मई को मनाया जाएगा. यह एकादशी 7 मई को सुबह 10:19 बजे शुरू होगी और 8 मई को दोपहर 12:29 बजे समाप्त होगी. उदय तिथि के अनुसार मोहिनी एकादशी का व्रत 8 मई को रखा जाएगा.
 
मोहिनी एकादशी की पूजा विधि

1-व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए. साफ कपड़े पहनें और व्रत रखने का संकल्प लें.

2-भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र पर पीले वस्त्र चढ़ाएं. चंदन, साबुत चावल, फूल, तुलसी के पत्ते, दीप, धूप और नैवेद्य अर्पित करके पूजा करें.

3-व्रत के दिन मोहिनी एकादशी की कथा सुननी या पढ़नी चाहिए. इसके साथ ही व्रत पूरा माना जाता है.

4-भगवान विष्णु का नाम लो. पूरे दिन भजन गाएं, कीर्तन करें और उपवास रखें. आप फल खा सकते हैं. अनाज, चावल और दालों से बचें.

5-रात्रि में जागना बहुत पुण्य माना जाता है. रात्रि को भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए व्यतीत करें.

6-12वें दिन सूर्योदय के बाद तुलसी जल से स्नान करें और व्रत तोड़ें. किसी योग्य ब्राह्मण को भोजन व दान देकर व्रत पूर्ण करें.
 
मोहिनी एकादशी का महत्व
शास्त्रों के अनुसार मोहिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है. यह व्रत आत्म-शुद्धि, धैर्य और भक्ति का प्रतीक है. मोहिनी एकादशी का पुण्य इतना अधिक है कि इसे अश्वमेध यज्ञ से भी अधिक फलदायी माना जाता है. इस एकादशी का नाम मोहिनी इसलिए पड़ा क्योंकि इसी दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर समुद्र मंथन के दौरान देवताओं को अमृत पिलाया था. इस रूप में भगवान विष्णु ने मोह और माया पर विजय प्राप्त की थी. इसलिए यह व्रत हमें सांसारिक मोह-माया से दूर कर आत्मा की शुद्धि की ओर ले जाता है. इस दिन व्रत रखने से घर में सुख, समृद्धि, वैभव, सौभाग्य और धन की वृद्धि होती है. जिन घरों में मोहिनी एकादशी की पूजा भक्ति भाव से की जाती है, वहां नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा प्रबल होती है.

Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.)  

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