धर्म
कार्तिक मास में गुरु नानक जयंती बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है. गुरु नानक देवजी ने सिख धर्म की स्थापना की थी. गुरु नानक जयंती को गुरु पर्व या प्रकाश पर्व के नाम से भी जाना जाता है. जानें
सिख धर्म के प्रथम गुरु नानक देव की जयंती. सिख धर्म के लोग कार्तिक पूर्णिमा का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं. क्योंकि इसी दिन गुरु नानक जयंती मनाई जाती है. इस दौरान गुरुद्वारों में भजन, कीर्तन और लंगर का आयोजन किया जाता है. इस दिन नानक देवजी की शिक्षाओं को याद किया जाना चाहिए. सुबह-सुबह जुलूस निकाले जाते हैं और इस दौरान गुरुद्वारों में विशेष रूप से रौनक रहती है. गुरु नानक देवजी ने समानता, प्रेम और सेवा का संदेश दिया. उनकी शिक्षाएँ समाज को मानवता की ओर अग्रसर कर रही हैं. गुरु नानक जयंती कब है, जानें क्या है इसका धार्मिक महत्व
गुरु नानक जयंती कब है?
गुरु नानक जयंती हर साल कार्तिक पूर्णिमा को मनाई जाती है. इस साल गुरु नानक जयंती बुधवार, 5 नवंबर को मनाई जाएगी.
गुरु नानक जयंती मुहूर्त
कार्तिक मास की पूर्णिमा 4 नवंबर को रात 10.36 बजे से शुरू होकर 5 नवंबर को शाम 6.48 बजे समाप्त होगी. इस समय ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4.46 से 5.37 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 1.56 से 2.41 बजे तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 5.40 से 6.5 बजे तक रहेगा.
गुरु नानक कौन थे?
गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 में ननकाना साहिब में हुआ था. उनके पिता का नाम मेहता कालू चंद और माता का नाम माता तृप्ता था. उन्होंने ईश्वर और सामाजिक न्याय का संदेश दिया. उन्होंने सिख धर्म की स्थापना की और इसके संदेश के प्रसार के लिए कई यात्राएँ कीं.
गुरु नानक जयंती का क्या महत्व है?
सिख धर्म में गुरु नानक जयंती का विशेष महत्व है. उन्होंने समानता, सेवा और प्रेम का संदेश दिया. इस विशेष अवसर पर लोग उनकी शिक्षाओं पर चलने का संकल्प लेते हैं. उन्होंने सामाजिक बुराइयों का विरोध किया और उन्हें दूर करने का प्रयास भी किया.
गुरु नानक जयंती को प्रकाश पर्व के रूप में भी मनाया जाता है, जहाँ गुरुद्वारों में कीर्तन और लंगर का आयोजन किया जाता है. नगर कीर्तन निकाले जाते हैं. लोगों को गुरु नानक देव की शिक्षाओं के बारे में बताया जाता है. इसलिए, गुरु नानक जयंती को प्रकाश पर्व के रूप में जाना जाता है.
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