धर्म
वट पूर्णिमा का व्रत ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि को रखा जाता है. यह दोनों ही व्रत करने से पति की आयु लंबी होती है. इससे दांपत्य जीवन सुखमय रहता है. सौभाग्य में बढ़ोत्तरी होती है.
वट सावित्री व्रत के 15 दिन पूर्व ही वट पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा. यह व्रत सावित्री की तरह ही है. इसे ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाता है, जबकि वट पूर्णिमा का व्रत ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि को रखा जाता है. यह दोनों ही व्रत करने से पति की आयु लंबी होती है. इससे दांपत्य जीवन सुखमय रहता है. सौभाग्य में बढ़ोत्तरी होती है. आइए जानते हैं कि जब वट सावित्री और वट पूर्णिमा एक ही व्रत हैं, तो इनमें 15 दिन का अंतर क्यों होता है. साथ ही इन दोनों व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा कयों की जाती है. इसके साथ ही जानें शुभ मुहूर्त और योग...
हिंदू पंचांग के अनुसार, वट पूर्णिमा के लिए जरूरी ज्येष्ठ पूर्णिमा की तिथि 10 जून को सुबह 11 बजकर 35 मिनट से शुरू होगी. यह 11 जून 2025 को दोपहर 1 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदयातिथि को देखते हुए वट पूर्णिमा का व्रत 10 जून 2025 को रखा जाएगा.
10 जून 2025 को वट पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा. इस दिन पूजा अर्चना का सबसे शुभ मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त में 04 बजकर 02 मिनट लेकर से 04 बजकर 42 मिनट तक रहेगा. वहीं दिन का शुभ मुहूर्त यानि अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 53 मिनट से दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा. वहीं वट पूर्णिमा व्रत की पूजा रवि योग में होगी, जो उस दिन सुबह से शाम तक बना रहेगा.
इस बार वट पूर्णिमा व्रत पर 3 बेहद शुभ योग बन रहे हैं. इनमें सबसे पहला वट पूर्णिमा सिद्ध योग, साध्य योग और रवि योग है. रवि योग सुबह 05 बजकर 23 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 02 मिनट तक रहेगा. रवि योग में सभी तरह के दोषों को मिटा देने की क्षमता होती है. वहीं सिद्ध योग सुबह से लेकर दोपहर 1 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. इसके बाद आखिरी तीसरा साध्य योग बनेगा. यह रात तक रहेगा. वट पूर्णिमा को अनुराधा नक्षत्र सुबह से लेकर शाम 6 बजकर 2 मिनट तक रहेगा. उसके बाद से ज्येष्ठा नक्षत्र होगा.
ज्योतिषचार्य के अनुसार, वट सावित्री और वट पूर्णिमा व्रत दोनों ही एक समान हैं. हालांकि वट पूर्णिमा और वट सावित्री व्रत में 15 दिनों का अंतर होता है. वट सावित्री अमावस्या तिथि को और वट पूर्णिमा व्रत पूर्णिमा तिथि के दिन होता है. उत्तर भारत में महिलाएं वट सावित्री व्रत 15 दिन पहले कर लेती हैं, जबकि अन्य राज्यों में महिलाएं वट पूर्णिमा व्रत 15 दिन बाद करती हैं. दोनों ही व्रत में सावित्री और सत्यवान की कथा पढ़ी जाती है.
Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.)
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