धर्म
सफाई और अव्यवस्था से लेकर आध्यात्मिक उपचार तक, संतुलन बहाल करें, सद्भाव को आकर्षित करें, और सकारात्मक ऊर्जा को सहजता से आमंत्रित करें.
वास्तु दोष का मतलब है कि आपके घर में चीजों की संरचना या व्यवस्था पंच तत्वों के सिद्धांतों के हिसाब से नहीं है. इससे घर में आने वाली ऊर्जा असंतुलन हो जाती है. आप इन उपायों को अपनाकर इस संतुलन को बहाल कर सकते हैं.
वास्तु दोषों का निवारण हमेशा घर की सफाई और अव्यवस्था को हटाने से शुरू होता है.
पुरानी, टूटी-फूटी और अनुपयोगी वस्तुओं (जैसे टूटी घड़ियाँ, टूटे बर्तन, फटे कपड़े और पुराने अखबार) को तुरंत हटा दें या दान कर दें. ये वस्तुएँ नकारात्मक ऊर्जा जमा करती हैं और प्रगति में बाधा डालती हैं.
घर के ब्रह्मस्थान (मध्य) और ईशान (उत्तर-पूर्व) कोने को हमेशा खाली, स्वच्छ और अच्छी तरह से रोशनी वाला रखें.
समुद्री नमक में नकारात्मक ऊर्जा को सोखने की अद्भुत क्षमता होती है. हफ़्ते में दो बार समुद्री नमक (या सेंधा नमक) मिले पानी से फर्श पोंछें. इससे घर की नकारात्मकता दूर होती है.
घर के बाथरूम या अन्य कोनों में जहाँ वास्तु दोष हो, वहाँ एक कांच के कटोरे में थोड़ा सा साबुत समुद्री नमक रखें. हर 15 दिन में इस नमक को बदलकर फेंक दें.
सुनिश्चित करें कि घर में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी और अच्छी हवा का संचार हो. अंधेरे कोने नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं. शाम के समय मुख्य द्वार और घर के कोनों में रोशनी अवश्य जलाएं.
ऊर्जा के प्रवाह को बाधित किये बिना उसे सही करने के लिए इन प्रतीकों का उपयोग करें:
घर में रोज़ सुबह-शाम कपूर या गुग्गुल जलाएँ. इसकी सुगंध और धुआँ वास्तु दोष और भूत-प्रेत के प्रभाव को दूर करने में मदद करता है. अगर घर के किसी कोने में वास्तु दोष हो, तो बिना जलाए वहाँ कपूर का एक टुकड़ा रख दें. जब वह टुकड़ा सिकुड़ जाए, तो उसे बदल दें.
अगर आपका मुख्य द्वार दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम की ओर है, या आपके घर में अक्सर बाहरी अशांति रहती है, तो मुख्य द्वार के ऊपर पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर लगाएँ. यह नकारात्मक ऊर्जा के विरुद्ध एक शक्तिशाली कवच का काम करता है.
मुख्य द्वार पर सिंदूर या सिंदूर से स्वस्तिक, ॐ या श्री गणेश जैसे शुभ चिन्ह बनाएँ. ये घर में प्रवेश करने वाली सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं.
उत्तर-पश्चिम दिशा में या मुख्य द्वार पर धातु की छड़ों (6 या 8 छड़ों वाली) वाली विंड चाइम लगाएँ. इसकी मधुर ध्वनि ऊर्जा के प्रवाह को सक्रिय और संतुलित करती है.
धार्मिक और आध्यात्मिक उपचार
घर में समय-समय पर सुंदरकांड या रामचरितमानस का पाठ करना अत्यंत शुभ होता है. इससे घर से नकारात्मक ऊर्जा शीघ्र ही दूर हो जाती है.
घर के सभी सदस्यों को प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए.
घर में तुलसी (पूर्व/उत्तर), मनी प्लांट (दक्षिण-पूर्व/उत्तर) और रबर प्लांट (पूर्व) जैसे शुभ पौधे लगाएं, लेकिन कांटेदार पौधों से बचें.
Disclaimer: यह ज्योतिष की गणना और मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए इसकी जिम्मेदारी या पुष्टी नहीं करता है.
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