धर्म
त्रिकुटा की पहाड़ियों से माता वैष्णो देवी मंदिर से लेकर भैरों मंदिर तक रोपवे के काम की शुरुआत हुई है. अभी माता के भवन तक पहुंचने का एक ही रास्ता है.
डीएनए हिंदी: जम्मू कश्मीर में स्थित माता वैष्णों देवी का मंदिर देश ही नहीं दुनिया भर में मशहूर है. देश ही नहीं दुनिया के अलग अलग हिस्सों में यहां हर दिन लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. अब दूर दराज से घंटों की दूरी तय कर वैष्णों देवी के मंदिर पहुंचने वाले भक्तों के लिए खुशखबरी है. अब मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का घंटों का सफर मिनटों में बदल जाएगा. इसकी वजह सरकार द्वारा रोपवे परियोजना पर काम शुरू करना है. यह रोपवे 250 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा.
रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस लिमिटेड की तरफ से करीब ढाई किलोमीटर लंबे रोपवे के लिए बोलियां मंगाई गई है. यह माता वैष्णों देवी मंदिर पर करीब 5200 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. इस प्रोजेक्ट की शुरुआत कटरा बेस कैंप के पास ताराकोट से होकर सांझीछत तक जाएगी. रोपवे बनने के बाद तीर्थयात्रियों को पांच से छह घंटे की पैदल यात्रा केवल छह मिनट की यात्रा को कम कर सकता है.
12 किलोमीटर लंबा है ट्रेक
अभी तक वैष्णो देवी मंदिर में भवन पहुंचने का एक मात्र रास्ता 12 किलोमीटर लंबा ट्रेक है. इसे जल्द तय करने का एक मात्र तरीका हेलिकॉप्टर है. इसके अलावा यह रास्ता पैदल ही तय करना पड़ता है. जिसमें छह और उस से भी ज्यादा का समय लग जाता है, लेकिन रोपवे तैयार होते ही यह रास्ता मिनटों में तय किया जा सकता है.
रोपवे की लंबे समय से थी जरूरत, ऐसे होगी कम
माता वैष्णों देवी के भवन तक पहुंचने के लिए छह घंटे तक पैदल चलना पड़ता है, जो लोग यह नहीं कर पाते. उनके पास सिर्फ हेलिकॉप्टर का ही विकल्प था. अब रोपवे बनने से यह समस्या खत्म हो जाएगी. जो लोग चलने या हेलिकॉप्टर से सफर करने में सक्षम नहीं है. वह इस रोपवे के तैयार होते ही मिनटों में भवन तक पहुंच सकते हैं. अभी इस यात्रा में करीब 6 घंटे का समय लगता है. बुजुर्गोंं को चढ़ाई के लिए घोड़े या पिट्ठू का सहारा लेना पड़ता है. वहीं रोपवे बनते ही पूरी सुरम्य घाटी का हवाई दृश्य प्राप्त करने में सक्षम होंगे और इससे पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है.
साल 2022 में 91 लाख श्रद्धालु ने किए माता वैष्णों देवी के दर्शन
माता वैष्णों देवी मंदिर में पिछले साल यानी 2022 में करीब 91 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे. उनमें से ज्यादातर जम्मू के पास 5,200 फीट की ऊंचाई पर त्रिकुटा पहाड़ियों में स्थित मंदिर में 12 किलोमीटर लंबी यात्रा करके पहुंचे.
Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें.)
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