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कांवड़ यात्रा शुरू होने से पूर्व ही उत्तराखंड सरकार ने एक आदेश जारी कर दिया है. इसमें कांवड़ रूट पर पड़ने वाले होटल ढ़ाबे से लेकर रेहड़ी पटरी वालों को लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र प्रदर्शित करने के आदेश दिए हैं. ऐसा न करने पर लाखों रुपये का जुर्माना लग सकता है.
कांवड़ यात्रा से पहले उत्तराखंड सरकार ने यात्रा मार्ग पर खाद्य विक्रेताओं के लिए लाइसेंस या पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया है. मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा कि जिन दुकानों पर यह प्रदर्शित नहीं होगा, उन्हें बंद कर दिया जाएगा. इसके साथ ही 2 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने मंगलवार को घोषणा की कि यह कदम “लाखों श्रद्धालुओं को स्वच्छ और सुरक्षित भोजन मिले यह सुनिश्चित करने के लिए एक सख्त और समर्पित कार्य योजना लागू करने के लिए” उठाया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार खाद्य सुरक्षा की निगरानी के लिए एक व्यापक निगरानी अभियान भी शुरू करेगी.
स्वास्थ्य सचिव और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले सभी होटल, ढाबे, फूड स्टॉल और विक्रेताओं को अनिवार्य दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं. इनकी अनदेखी और उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि "हर खाद्य विक्रेता को अपने परिसर में उपभोक्ताओं को दिखाने के लिए अपने लाइसेंस या पंजीकरण प्रमाणपत्र की एक साफ प्रति प्रमुखता से प्रदर्शित करनी होगी. वहीं छोटे विक्रेताओं और फेरीवालों को भी एक फोटो पहचान पत्र और पंजीकरण प्रमाणपत्र रखना होगा. होटल, भोजनालय, ढाबे और रेस्तरां को स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाला 'खाद्य सुरक्षा डिस्प्ले बोर्ड' लगाना होगा, जिससे ग्राहकों को पता चले कि खाद्य गुणवत्ता के लिए कौन जिम्मेदार है." अनुपालन न करने वालों पर खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 55 के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें 2 लाख रुपये तक का जुर्माना शामिल है.
2024 में, जब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों ने विक्रेताओं को अपने नाम-पट्टिकाएँ प्रदर्शित करने के लिए अनिवार्य कर दिया था, तो सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप किया और इस कदम पर रोक लगा दी. सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इस मामले में पुलिस को निर्देश देने का अधिकार देने वाला कोई सरकारी आदेश नहीं था. अपने आदेश में, न्यायालय ने कहा कि कांवड़ यात्रियों को “शुद्ध शाकाहारी” भोजन परोसे जाने को सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 या स्ट्रीट वेंडर्स अधिनियम, 2014 के तहत ऐसे निर्देश जारी किए जा सकते हैं.
अधिकारियों का दावा है कि बेहतर पारदर्शिता के लिए है. सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए सरकार द्वारा आदेश जारी किए गये हैं. दुकान का नाम, लाइसेंस और पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएं. यह पारदर्शिता का मामला है, क्योंकि इस साल करीब 7 करोड़ कांवड़ यात्रियों के आने की उम्मीद है. ऐसे में कानून और व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण है और खाद्य विभाग प्रासंगिक होना जरूरी है.
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