Advertisement

Chhat puja : आज नहाय-खाय पर कद्दू-भात खाकर निर्जला व्रत की होगी शुरुआत, जानिए छठ पूजा के क्या हैं सख्त नियम

Nahay Khay Aaj: आज से छठ पूजा की शुरूआत हो गई है. आज नहाय-खाय पर कद्दू भात खाकर 36 घंटे का व्रत कल से प्रारंभ हो जाएगा.

Latest News
Chhat puja : आज नहाय-खाय पर कद्दू-भात खाकर निर्जला व्रत की होगी शुरुआत, जानिए छठ पूजा के क्या हैं सख्त नियम

आज नहाय-खाय पर कद्दू-भात खाकर निर्जला व्रत की होगी शुरुआत

Add DNA as a Preferred Source

डीएनए हिंदीः नहाय खाय पर व्रती नहा धोकर कर आज के दिन चने कि दाल, कद्दू की सब्जी और चावल का प्रसाद  ग्रहण करते हैं. ये सारा खाना सेंधानमक में बनता है और इस खाने के बाद से व्रत का प्रारंभ होता है. 

बता दें कि नहाय-खाय का मतलब होता है स्नान करके भोजन करना. छठ के नहाय खाय में व्रती नदियों और तालाब में स्नान करने के बाद अपने हाथों से अरबा चावल यानी कच्चा चावल का भात बनाते हैं और फिर कद्दू जिसे लौकी और घीया भी कहा जाता है उसकी सब्जी बनाते हैं. कुछ जगहों पर सरसों का साग भी बनता है. इसे भोजन रूप में मात्र एक बार ग्रहण किया जाता है. 

जय छठी मैया ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से…छठी मैया की आरती बिना पूजा है अधूरी, यहां पढ़ें

अगले दिन खरना को नमक का त्याग करके सिर्फ मीठा भोजन किया जाता है. इसमें गुड़ की खीर और पूड़ी खाई जाती है. इसके बाद तीसरे दिन निर्जला व्रत शुरू हो जाता है. सबसे पहले डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है फिर उगते सूर्य को. चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ का पर्व पूर्ण होता है.

पीले और लाल रंग के कपड़ों को पहनने का रिवाज

नहाय खाय पर व्रतीजन नए वस्त्र धारण करते हैं, महिलाएं पीले और लाल रंग के कपड़ों को पहनती हैं और नाक से लेकर पूरी सिर तक मांग भरती हैं. सोलहर श्रृंगार कर के इस दिन छठी मईया की पूजा और प्रसाद बनाया जाता है. 

Chhath Puja: आज नहाय-खाय के साथ शुरू हो रहा आस्था का महापर्व छठ, जानें व्रत के नियम-अर्घ्य का समय और कथा

जिस घर में छठ की पूजा होती है उस घर में जो व्रत नहीं रहते, उन्हें भी चार दिन तक सात्विक भोजन ही करना होता है. 

गीत गाते हुए बनता है प्रसाद
खाना पकाने के दौरान भी छठव्रती छठी मईया की गीतों महिलाएं गाती रहती हैं. वहीं नदी-तालाब पर भी जाते समय मंगल गीत गाते हुए ही जाया जाया जाता है. 

Chhath Puja Calendar : 28 अक्टूबर से शुरू हो रहा है छठ पर्व, जानिए नहाय-खाय से लेकर पारण तक की तिथि और शुभ मुहूर्त

लकड़ी के चूल्हे पर बनता है खाना
नहाय खाय से व्रत का खाना लकड़ी के चूल्हे पर बनता है. इस चूल्हे में केवल आम की लकड़ी का ही इस्तेमाल किया जाता है. इस दिन तमाम नियमों का पालन करते हुए भोजन बनाकर सबसे पहले सूर्य देव को भोग लगाया जाता है. उसके बाद छठ व्रती भोजन ग्रहण करते हैं और उसके बाद ही परिवार के दूसरे सदस्य भोजन कर सकते हैं.

जमीन पर होता है सोना
छठ का समापन होने तक व्रती को जमीन पर ही सोना होता है.  व्रती जमीन पर चटाई या चादर बिछाकर सो सकते हैं. छठ मईया के कमरे में हर कोई नहीं जा सकता है. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.

देश-दुनिया की ताज़ा खबरों Latest News पर अलग नज़रिया, अब हिंदी में Hindi News पढ़ने के लिए फ़ॉलो करें डीएनए हिंदी को गूगलफ़ेसबुकट्विटर और इंस्टाग्राम पर.

 

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement