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Rukmini Ashtami 2022: आज है रुक्मिणी अष्टमी, संकट से बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने देवी का किया था हरण, जानें कथा

Rukmini Ashtami: श्रीकृष्ण की कई रानियों में से उनकी पहली पत्नी देवी रुक्मिणी थीं, जानिए आज रुक्मिणी अष्टमी पर उनके विवाह की रोचक कथा.

Rukmini Ashtami 2022: आज है रुक्मिणी अष्टमी, संकट से बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने देवी का किया था हरण, जानें कथा

संकट से बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने देवी रुक्मिणी का किया था हरण

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डीएनए हिंदी: Krishna And Rukmini Vivah Katha हर साल पौष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी यानी आज  है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन श्रीकृष्ण की पटरानी देवी रुक्मिणी का जन्म हुआ था (Rukmini Ashtami 2022). कहा जाता है कि श्रीकृष्ण की कई रानियों में से पहली थी देवी रुक्मिणी (The First Queen And Chief Wife of Krishna).

हमेशा श्री कृष्ण के साथ राधा का नाम आता है, सच्चे प्रेम की बात करें तो सबसे सटीक उदाहरण राधा-कृष्ण (Radha Krishana) का मिलता है. इसके बावजूद देवी राधा कभी श्रीकृष्ण की पत्नी नहीं बन पाईं (Radha Krishana Story). यह सौभाग्य कई रानियों समेत देवी रुक्मिणी को प्राप्त हुआ. इनके विवाह का कथा बहुत ही रोचक है. जिसे आप जरूर जानना चाहेंगे, तो चलिए जानते हैं श्रीकृष्ण और देवी रुक्मिणी के विवाह का रोचक किस्सा.

रुक्मिणी अष्टमी 2022 डेट (Rukmini Ashtami 2022 Date)

रुक्मिणी अष्टमी इस साल 16 दिसंबर 2022, शुक्रवार को मनाई जाएगी. इस दिन धनु संक्रांति, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, कालाष्टमी भी है. इसी दिन से खरमास की शुरुआत भी हो रही है. लक्ष्मीस्वरूपा देवी रुक्मिणी की आराधना वैवाहिक जीवन में खुशहाली और धन में बढ़ोत्तरी करती है.

रुक्मिणी अष्टमी 2022 मुहूर्त (Rukmini Ashtami 2022 Muhurat)

हिंदू पंचांग के अनुसार पौष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 16 दिसंबर 2022 को सुबह 01 बजकर 39 मिनट से शरू होगी और अगले दिन 17 दिसंबर 2022 को सुबह 03 बजकर 02 मिनट पर इसका समापन होगा.

अभिजित मुहूर्त  - दोपहर 12:02 - दोपहर 12:43 (16 दिसंबर 2022)

रुक्मिणी अष्टमी पूजा विधि (Rukmini Ashtami Puja Vidhi)

रुक्मिणी अष्टमी के दिन प्रात: काल स्नान के बाद देवी लक्ष्मी की प्रतिमा के सामने रुक्मिणी देवी का स्मरण कर व्रत का संकल्प लें. मंत्रोच्चार के साथ श्रीकृष्ण का अभिषेक करें और फिर कुमकुम, हल्दी, अबीर, हल्दी, इत्र और फूल आदि से पूजा करें. घी का दीपक लगाएं, खीर का भोग अर्पित करें.  इस दिन दान में सुहागिन महिलाओं को सुहाग की सामग्री भेंट करना शुभ होता है. इससे सौभाग्य में वृद्धि का वरदान मिलता है. महाभारत में उल्लेख है कि देवी रुक्मिणी बहुत सुंदर और सर्वगुण संपन्न थीं.

देवी रुक्मिणी ने मन ही मन में मान लिए था श्रीकृष्ण को अपना पति

देवी रुक्मिणी विदर्भ देश के राजा भीष्मक की पुत्री थीं, जो बेहद बुद्धिमान, सुंदर और सरल स्वभाव की थीं. हर पिता की तरह राजा भीष्मक भी अपनी पुत्री के विवाह के लिए योग्य वर की तलाश कर रहे थे. ऐसे में राजा भीष्मक को  श्रीकृष्ण के साहस और वीरता के बारे में पता चला. श्रीकृष्ण की वीरता की कहानियां हर जगह सुनाई देती थी. ऐसे में यह सुनकर देवी रुक्मिणी ने उन्हें मन ही मन अपना पति मान लिया था और यह तय कर लिया था कि वह श्रीकृष्ण से ही विवाह करेंगीं.

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संकट में विवाह के लिए देवी रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को लिखा था पत्र 

राजा भीष्मक के पुत्र रुक्म का एक खास मित्र जिसका नाम चेदिराज शिशुपाल था, देवी रुक्मिणी से विवाह करना चाहता था. ऐसे में राजा भीष्मक ने अपने पुत्र रुक्म के कहने पर शिशुपाल से देवी रुक्मिणी का विवाह करने के लिए राजी हो गए. लेकिन देवी रुक्मिणी श्रीकृष्ण के अलावा किसी और से विवाह नहीं करना चाहती थीं. ऐसे में उन्होंने श्रीकृष्ण को एक पत्र लिखकर अपनी पूरी व्यथा बताई और उनसे अपने इस प्रेम के बारे में बताया.  श्रीकृष्ण को जैसे ही यह बात पता चली तो रुक्मिणी को संकट में देख वह विदर्भ राज्य पहुंचें. 

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कृष्ण ने किया देवी रुक्मिणी का किया था हरण

ऐसे में जब देवी रुक्मिणी से विवाह करने के लिए शिशुपाल राजा भीष्मक के द्वार पर आया तो कृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर लिया. जिसके बाद श्रीकृष्ण, शिशुपाल और रुक्म के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें श्रीकृष्ण को विजय प्राप्त हुआ. इसके बाद श्रीकृष्ण देवी रुक्मिणी को द्वारकाधीश ले गए जहां उन्होंने देवी रुक्मिणी से विवाह रचाया.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.) 

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