धर्म
श्रीमद्भागवत पुराण में जीवन का सारा सार छिपा है. इसमें कलयुग से संबंधित कई चौंकाने वाले दावे किये गये हैं. इन्हीं में ही 7 ऐसे चौंकाने वाली बातें लिखी हैं, जो कलयुग में भविष्यवाणी के रूप में सच होती दिखाई दे रही है.
Shrimad Bhagwat Puran: श्रीमद् भागवत पुराण हिंदू धर्म के सबसे महान पुराणों में से एक है. इसे महापुराण के नाम से भी जाना जाता है. श्रीमद् भागवत में 12 भाग (स्कंध), 335 अध्याय और 18,000 श्लोक हैं. भगवान श्रीकृष्ण ने इसके श्लोक और अर्थ अर्जुन को महाभारत युद्ध के समय समझाया था. इस पुराण में लिखी गई बातों को जीवन में उतारने पर व्यक्ति को सफलता की प्राप्ति हो सकती है. बेहद कम लोग जानते हैं कि इसमें कलियुग के बारे में भविष्यवाणियां भी की गई हैं,
भागवत पुराणा में कलयुग की शुरुआत से लेकर अंत तक के विषय में बताया गया है. आइए जानते हैं कि पुराण में वो 10 संदर्भ क्या हैं. इसमें लोगों के जीवन से लेकर उनकी अच्छी और बुरी चीजों को भी दिखाया गया है.
दम्पत्ये भिरुचिर हेतुर मायाव व्यवहारिके .
स्त्रित्वे पुम्स्तवे च हि रतिर् विप्रत्वे सूत्रमेव हि ..
अर्थ: कलियुग में स्त्री-पुरुष बिना विवाह के केवल शारीरिक आकर्षण के आधार पर एक साथ रहेंगे. व्यापार झूठ और छल पर चलेगा. ज्ञान या आचरण से नहीं, केवल जनेऊ पहनने से ही व्यक्ति ब्राह्मण माना जाएगा.
वित्तमेव कलौ नृणं जन्मचरा-गुणोदयः .
धर्म-न्याय-व्यवस्थां कारणं बलमेव हि ..
अर्थ: किसी व्यक्ति का धन उसके सम्मान, चरित्र और स्थिति को निर्धारित करेगा. अमीरों को उनके कार्यों की परवाह किए बिना अच्छा और महान माना जाएगा. न्याय और कानून सत्य या धार्मिकता पर आधारित नहीं होंगे, बल्कि केवल शक्ति, ताकत या प्रभाव पर आधारित होंगे.
ततश्च-नुदिनं धर्मः सत्यं शौचं क्षमा दया .
कालेना बलिना राजन् नन्क्षयतायुर्बलं स्मृतिः ..
अर्थ: कलियुग में सत्य, शुचिता, दया, शक्ति, स्मृति और आयु दिन-ब-दिन कम होती जाएगी.
लिंगम एव आश्रम-ख्यातौ अन्योन्य-अपात्ति-कारणम् .
अवृत्य न्याय-दौर्बल्यं पाण्डित्ये चपलं वाचः ..
अर्थ: कलियुग में न्याय पाना बेहद मुश्किल होगा. चतुर, स्वार्थी लोग बुद्धिमान मान माने जाएंगे, भले ही उनमें वास्तविक ज्ञान न हो.
क्षुत्त-त्रिद्भ्यां व्याधिभिष चैव सन्तप्स्यन्ते च चिन्तया .
त्रिमसद्-विंसति वर्षाणि परमायुः कलौ नृणाम् ..
अर्थ: भूख, बीमारी और निरंतर मानसिक चिंताओं के कारण लोग बहुत पीड़ित होंगे. मनुष्य की अधिकतम आयु धीरे-धीरे घटकर 20 से 30 वर्ष रह जाएगी.
दूरे वरयाणं तीर्थं, लावण्यं केशधारणं .
उदारंभर्ता स्वार्थ:, सत्यत्वे धारस्त्यमेव हि ..
अर्थ: लोग तीर्थ स्थानों की यात्रा करने के लिए दूर-दूर तक यात्रा करेंगे, लेकिन घर पर अपने माता-पिता का अनादर करेंगे. लंबे बालों को सुंदरता माना जाएगा और लोग जीवित रहने के लिए किसी भी तरह का काम करेंगे.
अनावृष्ट्य विनङ्कश्यन्ति दुर्भिक्षेण च पीडिताः .
शीतवातात्पप्रवृद्हिमैनार्योन्यतः प्रजाः ..
अर्थ: कलियुग में अनावृष्टि से सूखा पड़ेगा, लोग अकाल से पीड़ित होंगे. मौसम बहुत खराब हो जाएगा. कभी बहुत सर्दी होगी तो कभी बहुत गर्मी.
Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.)
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