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Surya Grahan 2025 Effect: पहले से ज्यादा खतरनाक होगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण, कई अशुभ घटनाओं के होने का भी अंदेशा

साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च को लगा और इसी दिन शनि ने भी अपनी राशि बदली. सूर्य ग्रहण उस समय हुआ जब शनि मीन राशि में प्रवेश कर रहा था. कट्टर दुश्मन सूर्य और शनि की युति भी हुई थी लेकिन अब दूसरे सूर्य ग्रहण को और भी अशुभ बताया जा रहा है.

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Surya Grahan 2025 Effect: पहले से ज्यादा खतरनाक होगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण, कई अशुभ घटनाओं के होने का भी अंदेशा

सूर्य ग्रहण कब लग रहा है?

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साल 2025 को लेकर कई नामी ज्योतिषियों ने गंभीर भविष्यवाणियां की हैं और उसमें से कई बातें सच भी हो चुकी हैं. साल के पहले सूर्य ग्रहण के बाद देश-दुनिया पर इसका असर युद्ध, हिंसा और आपदाओं के रूप में देखने को मिला था. अब चूंकि जल्द ही इस साल का दूसरा सूर्य ग्रहण लगने वाला है, तो इसे लेकर डर का माहौल है. साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च को लगा था दुनिया के कई देशों में युद्ध हुए और इसका बुरा असर भारत पर भी देखने को मिला.

पहलगाम हमला

पहले सूर्यग्रहण के बाद एक अशुभ स्थिति निर्मित हुई थी. इसके बाद पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों पर हमला किया गया, कई दिनों तक भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनी रही और सीमा क्षेत्र को काफी नुकसान पहुंचा. जनहानि हुई और भारत-पाकिस्तान संघर्ष ने कई दिनों तक पूरे देश में चिंता का माहौल बना दिया.

दूसरा सूर्य ग्रहण

साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 21 और 22 सितंबर की रात को लगेगा. यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भाद्रपद की अमावस्या तिथि को लगेगा, जिस दिन सर्वपितृ अमावस्या पड़ रही है. चूंकि इस दिन पितृ पक्ष समाप्त होता है, इसलिए इस अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है.
 
भारत पर प्रभाव

पहले सूर्य ग्रहण की तरह यह सूर्य ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा. पितृ अमावस्या पर धार्मिक कार्य या स्नान, तर्पण, तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान जैसे कार्यों में कोई बाधा नहीं आएगी. लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से इसका प्रभाव पड़ेगा.
 
आग, विस्फोट, भूस्खलन 

सूर्य ग्रहण का असर धरती पर रहता है, जबकि चंद्र ग्रहण का असर समुद्र और समुद्री क्षेत्रों में देखने को मिलता है. आने वाला सूर्य ग्रहण भूकंप, आग, पहाड़ों में भूस्खलन, ज्वालामुखी विस्फोट जैसी आपदाओं का कारण बन सकता है. इसके साथ ही राजनीतिक अशांति भी बढ़ेगी. अगर भूकंप समुद्र के अंदर आता है तो भयानक सुनामी आ सकती है. दरअसल ग्रहण के कारण हवा की गति में बदलाव होता है, जिससे धरती पर आंधी और तूफान का असर बढ़ जाता है. साथ ही समुद्र में पानी की गति में भी बदलाव होता है. इससे धरती के अंदर प्लेटों पर दबाव भी बढ़ता है और इनके टकराने से भूकंप आता है.

15 दिन में 2 ग्रहण 

सर्वपितृ अमावस्या की यह अवधि अधिक खतरनाक हो सकती है, क्योंकि सूर्य ग्रहण से ठीक 15 दिन पहले 7 सितंबर 2025 को चंद्र ग्रहण लगने वाला है, जो भारत में भी दिखाई देगा. इस प्रकार ये दोनों ग्रहण सामान्य रूप से अच्छे नहीं कहे जा सकते.

Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है. 

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