धर्म
Pind Daan Niyam: मृत पितरों को प्रेतलोक से मुक्ति के लिए पिंडदान का विधान है लेकिन आप गया में प्रवेश से पहले एक काम नहीं किए तो पूजा व्यर्थ होगी.
डीएनए हिंदीः पितृपक्ष में तीन पुश्तों के पूर्वजों तक का श्राद्ध किया जाता है और कोशिश की जाती है कि सभी मृत परिजनों का गया जाकर पिंडदान जरूर कर दिया जाए ताकि उनको प्रेतयोनी से मुक्ति मिल जाए. इसके लिए कुछ नियमों का पालन जरूर करना चाहिए वरना गया जाकर आपका किया गया पिंडदान कर्म व्यर्थ हो जाएगा.
श्राद्ध का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए कुछ अनिवार्य नियम हैं. गया में पिंडदान करने आने वाले पिंडदानी गया तीर्थ में उपवास नहीं करना चाहिए, उनके लिए फलाहार का विधान है. तो चलिए जानें कि गया में पिंडदान के लिए आने से पहले क्या कराना जरूरी होता है और श्राद्धकर्म के क्या नियम हैं.
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गया पहुंचने से पहले करा लें मुंडन
श्राद्ध में मिट्टी के बर्तन को ग्रहण करने की भूल न करें.
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पिंडदान का सर्वोत्तम समय
पितरों को तृप्त करने के लिए तर्पण 11 बजे के बाद करें और श्राद्ध की उत्तम बेला मध्याह्न अथवा अपराह्न मानी गई है यानी 11ः30 से 12ः30 के बीच. श्राद्ध करने वाले को भूमि पर शयन करना. गया तीर्थ क्षेत्र में रात्रि निवास अगर कर रहे तो एक बार अन्न ग्रहण करें और सत्य का आचरण करें. धोती पहनने के साथ कंधे पर अंगौछा रखें. नंगे पैर से चलें, तेल मालिश, सुगंध से दूर रहे और ब्रह्मचर्य का पालन करें.
ध्यान रखें इन बातों का भी
श्राद्ध में कुछ निषिद्ध है. पिंड पर केला अर्पण नहीं करना चाहिए.
खुले आसमान के नीचे ही पिंडदान करना चाहिए.
पिंड को स्थिर जल में डालना चाहिए.
क्रोध, तामसिक भोजन करना, दान लेना वर्जित है.
गया तीर्थ में प्रवेश के पहले ही मुंडन कराना.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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