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Shani Pradosh Vrat: आप भी झेल रहे हैं शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रकोप तो आज कर लें ये काम, प्रभावों से मिलेगा छुटकारा

अगर आप कर्म फल दाता शनिदेव के क्रूर प्रभावों से जूझ रहे हैं तो शनि प्रदोष के अलावा हर शनिवार को भगवान शिव के मंत्र जाप के साथ ही शिवलिंग और शनिदेव पर सरसों के तेल से अभिषेक करें.

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Shani Pradosh Vrat: आप भी झेल रहे हैं शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रकोप तो आज कर लें ये काम, प्रभावों से मिलेगा छुटकारा
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Shani Dev Puja And Upay: शनिदेव की साढ़ेसाती और ढैय्या व्यक्ति के जीवन को ​कठिनाईयों से भर देती है. व्यक्ति को तमाम संकट और समस्याओं का सामना करना पड़ता है. अगर आप भी इससे जूझ रहे हैं तो शनि प्रदोष पर भगवान शिव के साथ ही शनि देव की पूजा अर्चना कर इनके क्रूर प्रभावों से छुटकारा पा सकते हैं. आज शनि प्रदोष व्रत है. इस व्रत की महिमा शास्त्रों और पुराणों में भी बताई गई है. हर माह में प्रदोष व्रत दो बार आते हैं. इसमें शनिदेव के साथ ही भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से व्यक्ति के सभी संकट और कष्ट नष्ट हो जाते हैं...

ये है शनि प्रदोष व्रत की तिथि और मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार शनि प्रदोष का व्रत 24 मई 2025 को मनाया जाएगा. यह ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 24 मई को शाम 7 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगा. यह अगले दिन 25 मई को शाम 3 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगा. ऐसे में उदयतिथि के अनुसार प्रदोष व्रत और इसकी पूजा अर्चना 24 मई को की जाएगी. 

ये है शनि प्रदोष व्रत की महिमा

शनि प्रदोष व्रत उन जातकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जो लोग शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती से जूझ  रहे हैं. उनके अशुभ प्रभावों से बचने के लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण है. शनि प्रदोष व्रत करने से शनि के बुरे प्रभावों से मुक्ति मिलती है. इसके साथ ही संतान सुख और उत्पत्ति के लिए भी शनि प्रदोष व्रत फलकारी होता है. इससे भगवान शिव के साथ ही शनिदेव की कृपा मिलती है. अगर किसी की कुंडली में राहु केतु या कालसर्प दोष है तो इस व्रत को रखने से उसके अशुभ प्रभाव भी कम हो जाते हैं. 

ये हैं शनि के प्रभाव कम करने के उपाय

अगर आप कर्म फल दाता शनिदेव के क्रूर प्रभावों से जूझ रहे हैं तो शनि प्रदोष के अलावा हर शनिवार को भगवान शिव के मंत्र जाप के साथ ही शिवलिंग और शनिदेव पर सरसों के तेल से अभिषेक करें. ऐसा करने से महादेव के साथ ही शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है. इसके साथ ही पीपल की पूजा अर्चना करें. दीपक जलाएं. इसे भगवान भक्त की हर इच्छाओं को पूर्ण करने के साथ ही पाप और परेशानी को नष्ट करते हैं. 

Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.) 

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