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Shani Puja Muhurat 2025: मार्च माह के आखिरी सप्ताह में है शनि अमावस्या, जानें तारीख से लेकर शुभ मुहूर्त, योग और महत्व

Shani Amavasya 2025: शनि अमावस्या पर शनिदेव की पूजा अर्चना करने से जीवन में चल रही कठिनाईयां और समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है. अमावस्या तिथि पर पूर्वजों का तर्पण और पिंडदान करने विशेष महत्व है.

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Shani Puja Muhurat 2025: मार्च माह के आखिरी सप्ताह में है शनि अमावस्या, जानें तारीख से लेकर शुभ मुहूर्त, योग और महत्व
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Shani Amavasya Shubh Muhurat 2025: हिंदू धर्म में अमावस्या का बड़ा महत्व है. इस तिथि में किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना बेहद शुभ और फलदायक माना जाता है. साथ ही महादेव की पूजा अर्चना करना बेहद लाभकारी होता है. व्यक्ति को संकटों से मुक्ति मिलती है. वहीं शनि अमावस्या पर शनिदेव की पूजा अर्चना करने से जीवन में चल रही कठिनाईयां और समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है. अमावस्या तिथि पर पूर्वजों का तर्पण और पिंडदान करने का विशेष महत्व है. इस दिन पितरों का भोजन निकालने और जल व दान देने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. ऐसे में आइए जानते हैं मार्च महीने में कब है शनि अमावस्या तिथि, शुभ मुहूर्त और योग...

शनि अमावस्या की ति​थि और शुभ मुहूर्त (Shani Amavasya Shubh Muhurat 2025)

वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र अमावस्या तिथि की शुरुआत 28 मार्च 2025 की रात 7 बजकर 55 मिनट पर होगी. यह अगले दिन यानी 29 मार्च 2025 को शाम 4 बजकर 27 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि को देखते हुए शनि अमावस्या 29 मार्च 2025 को मनाई जाएगी. इसमें स्नान से लेकर पूजा अर्चना करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होगी. इसके साथ ही शनि अमावस्या पर शुभ योग भी बन रहे हैं, जिनमें भक्त की हर मनोकामन पूर्ण हो सकती है. 

शनि अमावस्या पर ये हैं शुभ योग  (Shani Amavasya Shubh Yog)

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि अमावस्या के दिन ब्रह्म और इंद्र का एक ऐसा योग बन रहा है, जो  बेहद दुर्लभ है. इसके साथ ही इस दिन शिववास योग का भी संयोग है. इन तीनों योग में महादेव और न्याय के देवता शनिदेव की पूजा अर्चना करने के साथ ही व्रत रखने से भक्त के हर पाप और दोष मिट जाएंगे. गंगा में स्नान और दान करने से पुण्यों की प्राप्ति होगी. अनजाने में होने वाले पाप कट जाएंगे. 

यह है स्नान से लेकर दान और पूजा का शुभ मुहूर्त (Puja Shubh Muhurat)

शनि अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त से लेकर निशिता और विजया से लेकर गोधूलि मुहूर्त में अलग अलग समय पर कई शुभ मुहूर्त हैं. इनमें सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त की शुरुआत सुबह 04 बजकर 42 मिनट से 05 बजकर 28 मिनट तक रहेगा. वहीं विजया मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 19 मिनट तक रहेगा. गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 36 मिनट से शाम 06 बजकर 59 मिनट तक होगा और निशिता मुहूर्त रात्रि 12 बजकर 02 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक होगा.

Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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