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Pradosh Vrat: फरवरी माह का दूसरा प्रदोष व्रत कल, जान लें शाम को भगवान शिव की पूजा का सटीक समय

Bhaum Pradosh fast: भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. इसका उल्लेख शिवपुराण में भी मिलता है. शिव पुराण के अनुसार प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को सुख-संपत्ति की प्राप्ति होती है और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

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Pradosh Vrat: फरवरी माह का दूसरा प्रदोष व्रत कल, जान लें शाम को भगवान शिव की पूजा का सटीक समय

भौम प्रदोष व्रत कल, शाम को कब करें शिवजी की पूजा? 

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हर माह आने वाले प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है. इस व्रत की महिमा शिवपुराण में भी वर्णित है. प्रदोष व्रत भगवान शिव और देवी पार्वती का आशीर्वाद पाने के लिए रखा जाता है. ऐसा कहा जाता है कि अगर किसी की मनोकामना पूरी न हो रही हो तो उसे यह व्रत अवश्य रखना चाहिए. क्योंकि इस व्रत को करने से सभी की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसके साथ ही आपके जीवन में आने वाली समस्याओं से भी मुक्ति मिलती है. आइए जानें फरवरी माह में दूसरा प्रदोष व्रत किस दिन रखा जाएगा. जानें प्रदोष व्रत की सही तिथि, महत्व और पूजा विधि.

प्रदोष व्रत कब है?

द्वादशी तिथि 25 फरवरी, मंगलवार को दोपहर 12.48 बजे तक रहेगी. इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू हो जाएगी. प्रदोष व्रत के संबंध में शास्त्रों में प्रावधान है कि प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. ऐसे में प्रदोष व्रत 25 फरवरी, मंगलवार को रखा जाएगा. 25 फरवरी को मंगलवार होने के कारण इस व्रत को भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा.
 
प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त

25 फरवरी: शुभ चौघड़िया दोपहर 3.26 से शाम 4.52 तक.

इसके बाद शाम 7.52 से 9.26 तक लाभ चौघड़िया है.

आप इनमें से किसी भी समय पूजा कर सकते हैं.

प्रदोष व्रत का महत्व

शिवपुराण में कहा गया है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से प्रदोष व्रत करता है. इस संसार में उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं तथा वह अनजाने में किए गए पापों से भी मुक्त हो जाता है. साथ ही भगवान शिव की कृपा से उन्हें इस लोक के बाद शिवलोक में स्थान मिलता है. इसके साथ ही अगर किसी की कुंडली में चंद्र दोष है तो इस व्रत के प्रभाव से उन्हें चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है. व्यक्ति का भाग्य भी जागृत हो जाता है.

प्रदोष व्रत पूजा विधि

  1. सुबह सबसे पहले भगवान शिव, माता पार्वती और पूरे शिव परिवार का पंचामृत से अभिषेक करें. इसके बाद सभी को कपड़े दिए जाते हैं.
  2. सायंकाल स्नान करके भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए. इसके लिए सबसे पहले भगवान शिव को भोग लगाना चाहिए.
  3. आठ अलग-अलग दिशाओं में घी के दीपक जलाएं.
  4. इसके बाद बेल पत्र, इत्र, पुष्प, धूप, दीप, चावल, नैवेद्य, लौंग, सुपारी आदि अर्पित करना चाहिए.
  5. इसके बाद प्रदोष व्रत की कथा सुनें और शिव चालीसा का पाठ करें. अंत में भगवान शिव और देवी पार्वती की आरती करें.
  6. शिव भक्तों को इस दिन भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना चाहिए.

Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.)   

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