धर्म
Kalashtami Vrat Puja Vidhi: सावन महीने का मासिक कालाष्टमी व्रत आज 17 जुलाई को रखा जा रहा है. इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव की पूजा होती है.
Sawan Kalashtami Vrat Puja Vidhi 2025: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है. यह महीना भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने के लिए खास होता है. आज सावन में कालाष्टमी का व्रत है. कालाष्टमी व्रत पर भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव की पूजा होती है. ऐसे में यह दिन और भी खास हो गया है. इस दिन पूजा अर्चना करने से रोग, दोष और दरिद्रता दूर होती है. चलिए आपको कालाष्टमी व्रत की पूजा विधि के बारे में बताते हैं.
- कालाष्टमी व्रत की पूजा के लिए सुबह उठकर स्न्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र पहन लें. इसके बाद चौकी पर भगवान शिव और मां पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें.
- काल भैरव की पूजा में भगवान काल भैरव की प्रतिमा लगाएं. भगवान को फल और फूल अर्पित करें. भगवान के समक्ष दीपक जलाएं और इसके बाद मंत्रों का जाप करें और भगवान काल भैरव की आरती अवश्य करें.
ॐ कालभैरवाय नमः
ॐ भैरवाय नमः
ॐ भयहरणं च भैरव:
ॐ तीखदन्त महाकाय कल्पान्तदोहनम्, भैरवाय नमस्तुभ्यं अनुज्ञां दातुर्माहिसि
ॐ ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं
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जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा
जय काली और गौर देवी कृत सेवा
प्रभु जय भैरव देवा
तुम्ही पाप उद्धारक दुःख सिंधु तारक
भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक
जय भैरव देवा
वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी
महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी,
जय भैरव देवा
तुम बिन देवा, सेवा सफल नहीं होवे
चौमुख दीपक दर्शन से सब दुःख खोवे,
जय भैरव देवा
तेल चटकी दधि मिश्रित भाषावाली तेरी
कृपा कीजिये भैरवजी, करिए नहीं देरी,
जय भैरव देवा
पांव घुंघरू बाजत अरु डमरू दमकावत
बटुकनाथ बन बालक जल मन हरषावत,
जय भैरव देवा
कालभैरवजी की आरती जो कोई जन गावे
कहे धरनी धर मानुष मनवांछित फल पावे
जय भैरव देवा
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