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Sakat Chauth 2025: आज रखा जाएगा सकट चौथ का व्रत, जानें शुभ मुहूर्त से लेकर पूजा विधि

Sakat Chauth Shubh Muhurt: सकट चौथ का व्रत 17 जनवरी को रखा जाएगा. सकट चौथ पर गणेश भगवान की पूजा की जाती है. चलिए आपको शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में बताते हैं.

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Sakat Chauth 2025: आज रखा जाएगा सकट चौथ का व्रत, जानें शुभ मुहूर्त से लेकर पूजा विधि

Sakat Chauth 2025

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Sakat Chauth Vrat 2025: सकट चतुर्थी का व्रत माघ महीने की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को रखा जाता है. इस बार यह तिथि 17 जनवरी 2025 को पड़ रही है. सकट चतुर्थी का व्रत और पूजन इसी दिन किया जाएगा. सकट चतुर्थी पर भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है. आइये आपको पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व के बारे में बताते हैं.

सकट चतुर्थी का पूजा मुहूर्त (Sakat Chauth Puja Muhurat)

सकट चतुर्थी का पूजन शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 27 मिनट से लेकर 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा. पूजा का दूसरा मुहूर्त 8 बजकर 34 मिनट से 9 बजकर 53 मिनट तक होगा. चंद्रमा को अर्घ्य देने का समय रात को 9 बजकर 9 मिनट पर होगा.

सकट चतुर्थी का महत्व (Sakat Chauth Significance)

यह व्रत भगवान गणेश जी को समर्पित होता है. महिलाएं यह व्रत संतान की खुशहाली और लंबी उम्र के लिए करती हैं. महिलाएं सकट चतुर्थी पर निर्जला व्रत रखती हैं. व्रत के साथ ही गणेश जी की कथा सुनती है.

सकट चतुर्थी पूजन विधि (Sakat Chauth Puja Vidhi)

व्रत के दिन सुबह उठकर स्नान कर व्रत का संकल्प लें. मंदिर में चौकी लगाएं गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें. भगवान गणेश जी को सिंदूर, फूल, फल, मिठाई, दूर्वा और तिल से बनी चीजें समर्पित करें. पूजन करने के बाद गणेश जी की आरती करें.

गणेश जी की आरती (Ganesh Ji Ki Aarti)

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.)   

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