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Durga Saptashati Path Niyam: नवरात्रि पर दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के नियम और विधि जानते हैं आप?, यहां जाने पूजा नियम

नवरात्रि पर अगर आप दुर्गा सप्तशती का पाठ कर रहे हैं तो आपको इसके नियम और विधि का सही ज्ञान होना जरूरी है.

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Durga Saptashati Path Niyam: नवरात्रि पर दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के नियम और विधि जानते हैं आप?, यहां जाने पूजा नियम

दुर्गा शप्तसती पाठ नियम

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शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर से शुरू हो गई है और 1 अक्टूबर 2025 को समाप्त होगी. इस दिन देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. इस दौरान कई लोग दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करते हैं. इस नवरात्रि में अगर आप हमारी योजना के अनुसार दुर्गा सप्तशती का पाठ करेंगे, तो आप आसानी से सभी 13 अध्याय पूरे कर पाएंगे. यह एक नियम भी है. यहां 3 दिन, 7 दिन और 9 दिन की योजनाएं विस्तार से दी गई हैं. साथ ही, यहां सप्तशती पाठ की विधि भी जानें.
 
1. पहली विधि: तीन दिनों तक पाठ करने की विधि: पहले दिन पहला अध्याय, दूसरे दिन दूसरा, तीसरा और चौथा अध्याय, तथा तीसरे दिन पाँचवाँ अध्याय, जो अन्तिम तेरहवें अध्याय तक विस्तृत होता है.
 
2. दूसरी विधि: 7 दिन तक पाठ करने की विधि: पहले दिन पहला अध्याय, दूसरे दिन दूसरा और तीसरा अध्याय, तीसरे दिन चौथा अध्याय, पांचवें दिन पांचवां, छठा, सातवां और आठवां अध्याय, छठे दिन छठा अध्याय और सातवें दिन बारहवां अध्याय.
 
3. तीसरा अध्याय: 9 दिन तक पाठ करने की विधि: पहले दिन पहला अध्याय, दूसरे दिन दूसरा और तीसरा अध्याय, तीसरे दिन चौथा अध्याय, चौथे दिन पांचवां अध्याय, पांचवें दिन छठा और आठवां अध्याय, आठवें दिन सातवां, नौवां और दसवां अध्याय, नौवें दिन ग्यारहवां अध्याय और नौवें दिन तेरहवां अध्याय.
 
दुर्गा सप्तशती का पाठ करने की विधि:
सबसे पहले पवित्र स्थान की मिट्टी से एक वेदी बनाएँ और उस पर जौ और गेहूं बोएं. फिर उस पर विधिपूर्वक कलश स्थापित करें. कलश के ऊपर मूर्ति स्थापित करें. यदि मूर्ति कच्ची मिट्टी, कागज़ या सिंदूर की हो और स्नान से उसके क्षतिग्रस्त होने का खतरा हो, तो उस पर दर्पण स्थापित करें. यदि मूर्ति न हो, तो कलश के पीछे स्वस्तिक बनाएँ और दोनों हाथों में त्रिशूल लेकर दुर्गा का चित्र, पुस्तक और शालग्राम रखकर विष्णु जी की पूजा करें. पूजा सात्विक होनी चाहिए, राजसिक या तामसिक नहीं.
 
नवरात्रि व्रत के आरंभ में स्वस्तिवाहक शांति का पाठ करें और फिर सर्वप्रथम गणेश पूजन करें तथा मातृका, लोकपाल, नवग्रह और वरुण का विधिपूर्वक पूजन करें. तत्पश्चात, प्रधान देवता का षोडशोपचार पूजन करें. अपने मुख्य देवता का पूजन करें. पूजन वैदिक रीति से अथवा सम्प्रदाय द्वारा निर्धारित विधि से करना चाहिए. दुर्गा देवी के पूजन अनुष्ठान में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का पूजन तथा मार्कण्डेय पुराण के अनुसार श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ मुख्य कर्मकाण्ड है.
 
श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ करने की विधि:-

श्री दुर्गा सप्तशती ग्रन्थ का विधिपूर्वक पूजन करने के बाद इस मंत्र से प्रार्थना करनी चाहिए.

नमो देव्यै महादेवायै शिवायै सततं नमः.
नमः प्रकृतियै भद्रायै नियतः प्रणतः स्म तमम्.

इस मंत्र से पंचोपचार पूजन करने के बाद विधिपूर्वक इसका जाप करना चाहिए. देवी व्रत में कुमारी पूजन अत्यंत आवश्यक माना गया है. यदि सामर्थ्य हो तो नवरात्रि भर प्रतिदिन नौ कुमारियों के चरण धोकर उन्हें देवी मानकर, गंध-पुष्प से उनकी पूजा करनी चाहिए, इच्छानुसार उन्हें मिष्ठान खिलाना चाहिए तथा वस्त्र आदि से उनका सम्मान करना चाहिए.
 
कुमारिका पूजा में दस वर्ष तक की कन्याओं के पूजन का विशेष महत्व है. दो वर्ष की कन्याओं को कुमारी, तीन वर्ष की कन्या को त्रिमूर्तिनी, चार वर्ष की कन्या को कल्याणी, पाँच वर्ष की कन्या को रोहिणी, छह वर्ष की कन्या को काली, सात वर्ष की कन्या को चंडिका, आठ वर्ष की कन्या को शाम्भवी, नौ वर्ष की कन्या को दुर्गा और दस वर्ष की कन्या को सुभद्रा स्वरूपा कहा जाता है. दुर्गा पूजा में दैनिक पूजन का विशेष महत्व है जिसमें प्रथम शैलपुत्री से लेकर नौवीं सिद्धिदात्री तक, नौ दुर्गाओं की नव शक्तियों और स्वरूपों की विशेष रूप से पूजा की जाती है.

Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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