धर्म
आज जन्माष्टमी की पूजा करते समय श्री कृष्ण चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए. श्री कृष्ण चालीसा में श्री कृष्ण की स्तुति की गई है. श्री कृष्ण चालीसा का पाठ करने से यश, सुख, समृद्धि, शांति, सफलता, संतान आदि की प्राप्ति होती है.
आज देशभर में जन्माष्टमी मनेगी. इस पर्व पर श्रीकृष्ण के बाल रूप की विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है. रात्रि 12 बजे के बाद श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है. भजन-कीर्तन किए जाते हैं. श्रीकृष्ण को आकर्षक ढंग से सजाए गए पालने में झुलाया जाता है और पालने के गीत गाए जाते हैं. प्रसाद के रूप में कृष्ण को उनका प्रिय माखन, मिश्री, पंचामृत, फल, मिठाई आदि अर्पित किए जाते हैं. मंत्रों का जाप किया जाता है. आज जन्माष्टमी की पूजा करते समय श्रीकृष्ण चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए. श्रीकृष्ण चालीसा में श्रीकृष्ण की स्तुति की जाती है. श्रीकृष्ण चालीसा का पाठ करने से यश, सुख, समृद्धि, शांति, सफलता, संतान आदि की प्राप्ति होती है.
श्रीकृष्ण चालीसा
दोहा
बंशी शोभित कर मधुर,
नीला, तेज़, गहरा.
अरुण अधर जनु बिम्बा फल,
आपको जन्मदिन की शुभकामनाएँ.
जय मनमोहन मदन छवि,
कृष्णचन्द्र महाराज.
करहु कृपा हे रवि तनय,
राखहु जन की लाज॥
चौपाई
जय यदुनन्दन जय जगवनन्दन.
जय वासुदेव, देवकी के आनंद!
जय यशुदा सुत नन्द दुलारे.
जय प्रभु भक्तन के दृग तारे॥
जय नट-नागर नाग नथैया.
कृष्ण ने कन्हैया को दूध पिलाया
पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो.
आओ दीनन कष्ट निवारो॥
वंशी मधुर अधर धरी तेरी.
मेरी इच्छा पूरी हो.
आओ हरि पुनि माखन चाखो.
आज लाज भारत की राखो॥
गोल कपोल, चिबुक अरुणारे.
मृदु मुस्कान मोहिनी डारे॥
रंजित राजिव नयन विशाला.
मोर मुकुट, वैजयंती माला.
बालियां पीली हो रही हैं.
कटि किंकणी काछन काछे॥
नील जलज सुन्दर तनु सोहे.
छवि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे॥
मस्तक तिलक, अलक घुंघराले.
आओ कृष्ण बांसुरी वाले॥
करि पय पान, पुतनहि तारयो.
अका बका कागासुर मारयो॥
मधुवन जलत अग्नि जब ज्वाला.
भाई शीतल, लखितहिं नंदलाला.
सुरपति जब ब्रज चढ़यो रिसाई.
मसूर धार वारि वर्षाई॥
लगत-लगत ब्रज चहन बहायो.
गोवर्धन की रक्षा नखधारी ने की.
लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई.
मुख महं चौदह भुवन दिखाई॥
दुष्ट कंस अति उधम मचायो.
कोटि कमल जब फूल मंगायो॥
नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें.
चरणचिन्ह दै निर्भय किन्हें॥
करि गोपिन संग रास विलासा.
सबकी पूरण करी अभिलाषा॥
केतिक महा असुर संहारयो.
कंसहि केस पकड़ि दै मारयो॥
मात-पिता की बन्दि छुड़ाई.
उग्रसेन कहं राज दिलाई॥
महि से मृतक छहों सुत लायो.
उन्होंने अपनी माता देवकी का दुःख मिटाया.
भौमासुर मुर दैत्य संहारी.
लाये षट दश सहसकुमारी॥
घास कटी नहीं जाती, वह शरणस्थली है.
जरासिंधु राक्षस कहं मारा॥
असुर बकासुर आदिक मारयो.
भक्तन के तब कष्ट निवारियो॥
दीन सुदामा के दुःख टारयो.
तंदुल तीन मूंठ मुख डारयो॥
प्रेम के साग विदुर घर मांगे.
दुर्योधन के मेवा त्यागे॥
लखि प्रेम की महिमा भारी.
ऐसे श्याम दीन हितकारी॥
भारत के पारथ रथ हांके.
लिए चक्र कर नहिं बल ताके॥
निज गीता के ज्ञान सुनाये.
भक्तों के हृदय पर अमृत बरसाओ.
मीरा थी ऐसी मतवाली.
विष पी गई बजाकर ताली॥
राना भेजा सांप पिटारी.
शालिग्राम बने बनवारी॥
निज माया तुम विधिहिं दिखायो.
उर ते संशय सकल मिटायो॥
तब शत निन्दा करी तत्काला.
जीवन स्वतंत्र है, शिशुपाल!
जबहिं द्रौपदी टेर लगाई.
दीनानाथ लाज अब जाई॥
नंदलाला तुरंत वासन बन गए.
बढ़े चीर भै अरि मुँह काला॥
अस नाथ के नाथ कन्हैया.
डूबते भँवर से नाव को बचाना.
सुन्दरदास आस उर धारी.
दयादृष्टि कीजै बनवारी॥
हे प्रभु, मेरे सारे बुरे कर्म दूर कर दो.
हमारे अपराधों को शीघ्र क्षमा करें.
खोलो पट अब दर्शन दीजै.
बोलो कृष्ण कन्हैया की जै॥
दोहा
यह चालीसा कृष्ण का,
अपनी पट्टी पर पाठ भेजें.
अष्ट सिद्धि नवनिधि फल,
लहै पदारथ चारि॥
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