धर्म
रंग पंचमी पर होली खेलने की जगह पूजा पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है. शास्त्रों में बताया गया है रंग पंचमी के दिन श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा का बहुत ही शुभ फल प्राप्त होता है.
सनातन धर्म में रंग पंचमी का त्योहार बड़ा महत्वपूर्ण और विशेष माना गया है. यह त्योहार हर साल होली के बाद चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि के दिन आता है. इसे देव पंचमी भी कहा जाता है. मान्यता है कि इसी दिन देवी और देवता स्वर्ग से धरती पर रंगों से खेलने आते हैं. यही वजह है कि रंग पंचमी को देवताओं की होली भी कहा गया है. आइए जानते हैं इस बार कब है देवताओं की होली यानी रंग पंचमी...
रंग पंचमी पर होली खेलने की जगह पूजा पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है. शास्त्रों में बताया गया है रंग पंचमी के दिन श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा का बहुत ही शुभ फल प्राप्त होता है. भगवान भक्तों की इच्छा पूर्ति करते हैं. यह दिन खास रूप से भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को समर्पित है. मान्यता है कि इस दिन भगवान को गुलाल अर्पित करने से दांपत्य जीवन में सुख और शांति आती है.
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 7 मार्च को शाम 7 बजकर 17 मिनट से होगी. इस तिथि समापन अगले दिन 8 मार्च 2026 को रात 9 बजकर 10 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि को देखते रंग पंचमी का त्योहार 8 मार्च 2026 को मनाया जाएगा.
रंग पंचमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 1 मिनट से लेकर 5 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 8 मिनट से लेकर 12 बजकर 56 मिनट तक रहेगा. इसमें विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से शुरू होगा. 3 बजकर 17 मिनट तक रहेगा. वहीं गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 23 मिनट से लेकर 06 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. इन सभी शुभ मुहूर्त में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा अर्चना करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है. इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा अर्चना करने से सभी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं.
रंग पंचमी की पूजा विधि की बात करें तो यह बहुत ही सरल है. रंग पंचमी के दिन सुबह उठकर स्नान करें. इसके बाद चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की तस्वीर रखें. इसके अलावा मूर्ति या चित्र भी लगा सकते हैं. भगवान को फूलों की माला पहनाने के साथ ही फूल अर्पित करें. भगवान को नये वस्त्र अर्पित कर उन्हें गुलाल, अबीर और सुगंधित पुष्प चढ़ाये. श्रीकृष्ण और राधा रानी को फल फूल और मिठाई अर्पित कर दीपक जलाकर उनकी पूजा अर्चना करें.
डिस्क्लेमर- यह जानकारी सामान्य ज्योतिष के आधार पर लिखी गई है. अधिक जानकारी के लिए ज्योतिषाचार्य से संपर्क करें.
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