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Karni Mata Mandir: ऐसा अनोखा मंदिर जहां मिलता है चूहों का खाया प्रसाद, पीएम मोदी करने वाले हैं यहां दर्शन, जाने मंदिर की विशेषता

Karni Mata Mandir Rajasthan: राजस्थान के बीकानेर शहर में माता करणी का मंदिर है. यह मंदिर यहां मौजूद चूहों की वजह से बेहद खास है इस मंदिर में प्रसाद भी चूहों का जूठा मिलता है.

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Karni Mata Mandir: ऐसा अनोखा मंदिर जहां मिलता है चूहों का खाया प्रसाद, पीएम मोदी करने वाले हैं यहां दर्शन, जाने मंदिर की विशेषता

Karni Mata Mandir

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Rat Temple in Rajasthan: राजस्थान के बीकानेर में स्थित करणी माता मंदिर चूहों की वजह से प्रसिद्ध है. इस मंदिर में हजारों की संख्या में चूहे मौजूद हैं. इन चूहों की वजह से ही यह मंदिर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. खबरों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 मई करणी माता मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचेंगे. ऐसे में यह मंदिर चर्चा में आ गया है. चलिए आपको इस मंदिर से जुड़ी मान्यताओं और विशेषताओं के बारे में बताते हैं.

कौन हैं करणी माता?

करणी माता को देवी दुर्गा का अवतार माना जाता है. करणी माता एक योद्धा और तपस्वी की तरह अपना जीवन व्यतीत करती थीं. करणी माता का जन्म माता का जन्म 1387 ईस्वी में हुआ था और वह करीब 150 साल तक जीवित रही थीं. देशभर में करणी माता को समर्पित कई मंदिर है लेकिन बीकानेर के देशनोक में स्थित करणी माता का मंदिर विशेष महत्व रखता है.

करणी माता मंदिर, बीकानेर

राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित करणी माता मंदिर चूहों के लिए प्रसिद्ध है. इस मंदिर को चूहों का मंदिर भी कहा जाता है. ऐसा यहां पर मौजूद हजारों चूहों की वजह से कहा जाता है. बीकानेर के इस करणी माता मंदिर में करीब 25,000 से अधिक चूहों का वास है. इस मंदिर में चूहों को भी पवित्र माना जाता है और पूजा जाता है. खासकर सफेद चूहे को विशेष रूप से शुभ माना जाता है.


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मंदिर में होती है चूहों की पूजा

करणी माता मंदिर में चूहों को शुभ माना जाता है. इस मंदिर में चूहों की पूजा होती है. भक्त चूहों के लिए दूध, मिठाई और अन्य भोग आते हैं. इन चूहों को माता करणी का पुत्र का अवतार माना गया है. ऐसा कहा जाता है कि, इन चूहों को मारने और इन्हें नुकसान पहुंचाने पर घोर पाप लगता है. मंदिर में चूहों की संख्या इतनी अधिक है कि, इन्हें पैर के नीचे आने से बचाने के लिए पैर को घसीटकर चलना होता है.

भक्तों को मिलता है चूहों का झूठा प्रसाद

मंदिर में चूहे प्रसाद को जूठा कर देते हैं इसके बाद प्रसाद को फेंका नहीं जाता है बल्कि, यही चूहों का जूठा प्रसाद भक्तों को दिया जाता है. इस मंदिर में नवरात्रि के समय मेला भी लगता है. मेले के समय हजारों की संख्या में भक्त इसमें शामिल होते हैं.

Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है, जो लोक कथाओं और मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टी नहीं करता है)

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