धर्म
इस दिन व्रत रखने मात्र से संतान या पुत्र प्राप्ति की इच्छा पूर्ण होती है. इस व्रत को करने से भगवान श्री हरी संतान की रक्षा करते हैं.
हिंदू धर्म की सभी तिथियों में एकादशी तिथि का बड़ा महत्व है. साल में कुल 24 तिथि आती हैं. इनमें सभी तिथियां अलग अलग होती है. इनमें पुत्रदा एकादशी भी बेहद विशेष है. इस दिन शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा की जाती है. इस दिन व्रत रखने मात्र से संतान या पुत्र प्राप्ति की इच्छा पूर्ण होती है. इस व्रत को करने से भगवान श्री हरी संतान की रक्षा करते हैं. आइए जानते हैं पुत्रदा एकादशी की सही तारीख से लेकर शुभ मुहूर्त एवं योग जानते हैं.
सावन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन पुत्रदा एकादशी मनाई जाती है. इस शुभ अवसर पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा अर्चना की जाती है. पुत्रदा एकादशी का महत्व सावन पड़ने की वजह से और भी बढ़ जाता है. शास्त्रों में कहा गया है कि पुत्रदा एकादशी पर व्रत करने पुत्र की प्राप्ति होती है. भगवान भक्त की हर मनोकामना को पूर्ण करते हैं.
हिंदू पंचांग के अनुसार, 04 अगस्त को सुबह 11 बजकर 41 मिनट पर सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत होगी. यह अगले दिन 05 अगस्त 2025 को दोपहर 01 बजकर 12 मिनट पर शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का समापन होगा. ऐसे में उदयातिथि को देखते हुए पुत्रदा एकादशी का व्रत 5 अगस्त को 2025 को रखा जाएगा.
पुत्रदा एकादशी तिथि पर कई मांगलिक योग बन रहे हैं. इनमें इंद्र योग का संयोग सुबह 07 बजकर 25 मिनट तक है. वहीं रवि योग सुबह 05 बजकर 18 मिनट से लेकर सुबह 11 बजकर 23 मिनट तक रहेगा. इसके साथ ही सबसे शुभ शिववास योग दोपहर 01 बजकर 13 मिनट से अगले दिन तक बना हुआ है. इस योग भगवान लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से भक्त की हर इच्छा पूर्ण हो जाती है.
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