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Guru Pradosh Vrat Katha: आज गुरु प्रदोष व्रत पर यहां पढ़ें व्रत कथा, हर कामना हो जाएगी पूरी

Pradosh Vrat Katha in Hindi: आज यानी 2 फरवरी को गुरु प्रदोष व्रत है. भोलेनाथ की पूजा करने और कथा श्रवण करने के बाद ही पूजा संपूर्ण होती है.

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Guru Pradosh Vrat Katha: आज गुरु प्रदोष व्रत पर यहां पढ़ें व्रत कथा, हर कामना हो जाएगी पूरी

Pradosh Vrat Katha in Hindi: गुरु प्रदोष व्रत कथा 

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डीएनए हिंदीः माघ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी यानी आज 2 फरवरी को गुरु प्रदोष व्रत रखा जा रहा है. गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने की वजह से इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है. गुरु प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है और इस दिन उनके साथ पूरे शिव परिवार का पूजन विधि-विधान के साथ किया जाता है. महिलाएं ये व्रत अखंड सौभाग्य की प्राप्ति और संतान सुख की कामना से रखती हैं. अगर आप भी प्रदोष व्रत रख रहे हैं तो पूजा के बाद व्रत कथा पढ़ना न भूलें.

गुरु प्रदोष व्रत कथा (Guru Pradosh Vrat Katha)

प्राचीन समय में एक ब्राम्हणी रहती थी, जो पति की मृत्यु के बाद अपना पालन-पोषण भिक्षा मांगकर करती थी. एक दिन जब वह भिक्षा मांग कर लौट रही थी, तो उसे रास्ते में दो बालक दिखे, जिन्हें वह अपने घर ले आई. जब वे दोनों बालक बड़े हो गए तो ब्राह्मणी दोनों बालक को लेकर ऋषि शांडिल्य के आश्रम चली गई. जहां ऋषि शांडिल्य ने अपने तपोबल से बालकों के बारे में पता कर कहा-हे देवी! ये दोनों बालक विदर्भ राज के राजकुमार हैं. गंदर्भ नरेश के आक्रमण से इनके पिता का राज-पाठ छीन गया है.

ब्राह्मणी और राजकुमारों ने विधि-विधान से प्रदोष व्रत किया. फिर एक दिन बड़े राजकुमार की मुलाकात अंशुमती से हुई, दोनों एक-दूसरे को चाहने लगे. तब अंशुमती के पिता ने राजकुमार की सहमति से दोनों की शादी कर दी. फिर दोनों राजकुमार ने गंदर्भ पर हमला किया और उनकी जीत हुई. बता दें कि इस युद्ध में अंशुमती के पिता ने राजकुमारों की मदद की थी. दोनों राजकुमारों को अपना सिंहासन वापस मिल गया और गरीब ब्राम्हणी को भी एक खास स्थान दिया गया, जिससे उनके सारे दुख खत्म हो गए. राज-पाठ वापस मिलने का कारण प्रदोष व्रत था, जिससे उन्हें संपत्ति मिली और जीवन में खुशहाली आई.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.) 

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