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New Year Upay: नए साल पर ब्रह्म मुहूर्त में करें इन मंत्रों का जाप, गृह क्लेश से पैसों की किल्लत तक होगी दूर

Brahma Muhurta Upay For New Year: अगर आप आने वाले नए साल के पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त में इन मंत्रों का जाप करेंगे तो इससे गृह क्लेश से लेकर पैसों की किल्लत तक दूर हो सकती है..

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New Year Upay: नए साल पर ब्रह्म मुहूर्त में करें इन मंत्रों का जाप, गृह क्लेश से पैसों की किल्लत तक होगी दूर

Brahma Muhurta Upay For New Year

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हिंदू धर्म में ब्रह्म मुहूर्त (Brahma Muhurat importance) को सबसे उत्तम और शुभ समय माना जाता है, सेहत की दृष्टि से भी इस समय उठना काफी लाभकारी होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मुहूर्त में किए गए अच्छे कर्मों का शुभ परिणाम मिलता है और पूजा-पाठ या मंत्र जाप का फल शीघ्र ही प्राप्त हो सकता है. कहा जाता है इस दौरान किए गए कार्यों का शुभ परिणाम लंबे समय तक बना रहता है. 

ऐसे में अगर आप आने वाले नए साल के पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त में इन मंत्रों का जाप करेंगे तो इससे गृह क्लेश से लेकर पैसों की किल्लत तक दूर हो सकती है, तो आइए जानते हैं इन खास उपायों के बारे में... 

क्या है साल 2025 के पहले ब्रह्म मुहूर्त का समय?
साल 2025 के ब्रह्म मुहूर्त का समय 1 जनवरी सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 06 बजकर 19 मिनट तक रहेगा. ऐसे में इस शुभ मुहूर्त में आप गृह क्लेश, पैसों की किल्लत, घर-परिवार की सुख समृद्धि के लिए इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं,  

ब्रह्म मुहूर्त में करें ये काम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हथेलियां में देवी-देवताओं का वास होता है, इसलिए इस शुभ मुहूर्त पर सुबह उठते ही अपनी हथेली को देखकर नीचे बताए गए मंत्र का जप करें. इससे देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और धन की किल्लत दूर होती है. 

मंत्र-  “कराग्रे वसते लक्ष्मी, करमध्ये सरस्वती, करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्”

इसके अलावा साल के पहले ब्रह्म मुहूर्त में जागकर स्नान करें और फिर सुखासन में बैठकर अपनी आंखों को बंद कर नीचे बताए गए मंत्र का जप करें. जाप पूरा होने के बाद हाथ में थोड़ा-सा जल लेकर अपनी मनोकामना कहें और जल को हाथ से गिराएं. मान्यता है इससे देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: शशि भूमि सुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु॥

गायत्री मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः
तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्यः धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् |

(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.)   

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