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Paush Puja Vidhi: पौष माह में ऐसे करें पूजा, इन बातों का रखें विशेष ध्यान

पौष माह में पूजा अर्चना और व्रत करने से कई लाभ प्राप्त होते हैं. भगवान व्यक्ति की हर मनोकामना पूर्ति करते हैं.

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Paush Puja Vidhi: पौष माह में ऐसे करें पूजा, इन बातों का रखें विशेष ध्यान
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Paush Puja Vidhi: हिंदू धर्म में पौष माह को बेहद विशेष माना जाता है. इस माह की शुरुआत हो चुकी है. इसमें हिंदू कैलेंडर के हिसाब से यह साल का दसवां महीना होता है. इस महीने में सूर्य देव और भगवान विष्णु की उपासना की जाती है. पौष माह में पूजा अर्चना और व्रत करने से कई लाभ प्राप्त होते हैं. भगवान व्यक्ति की हर मनोकामना पूर्ति करते हैं. पंचांग के अनुसार, पौष का महीना 13 जनवरी 2025 तक रहेगा. इसी के बाद शुभ कार्यों की शुरुआत होगी. इस माह भगवान विष्णु, सूर्यदेव के साथ-साथ पितरों के निमित्त भी पूजा अर्चना करने के लाभ प्राप्त होंगे. इस माह में सूर्य को जल अर्पित करना काफी लाभकारी होता है...

पौष महीने में कैसे करें पूजा

पौष महीन में ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें. इसके साथ ही साफ सुथरे कपड़े धारण कर भगवान गणेश जी की पूजा अर्चना करें. साथ ही तांबे के लोटे में जल, लाल पुष्प, रोली और अक्षत अर्पित करें. इसके साथ ही उगते सूर्य को अर्घ्य दें. अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्र और गायत्री मंत्र का जप करें. अर्घ्य देते समय जल की धारा में देखकर सूर्य देव का दर्शन करना बेहद ही शुभ होता है. इसके बाद सूर्य देव को धूप या घी का दीपक दिखाएं. ऐसा करने के बाद भगवान विष्णु का जलाभिषेक व पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें. भगवान तुलसी दल का भोग लगाना बेहद शुभ होता है. 

इन बातों का रखें ध्यान

पौष माह में सूर्य देव की पूजा करने पर विशेष लाभ प्राप्त होते हैं. सूर्य की उपासना से लेकर व्रत करने पर इच्छा पूर्ण होती है. ऐसे में कुछ उपायों का पालन करने पर व्यक्ति की इच्छाएं पूर्ण होती है. इसमें सबसे महत्वपूर्ण है अर्घ्य अर्पित कर सूर्य नाम का जप करें. प्रभात वेला में सूर्य दर्शन और सूर्य को नमस्कार करना जीवन में सफलता और समृद्धि लाता है. 15 जनवरी 2025 के बाद खरमास खत्म हो जाएंगे. ऐसे में शादी विवाह से लेकर गृह प्रवेश, मुंडन और प्राण प्रतिष्ठा समेत मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे. 

पौष माह में पड़ रहे हैं ये त्योहार

26 दिसंबर- सफला (पौष कृष्ण) एकादशी
28 दिसंबर- प्रदोष व्रत
30 दिसंबर- स्नान,दान, सोमवती अमावस्या
06 जनवरी- उभय सप्तमी
10 जनवरी- पुत्रदा एकादशी

(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.)   

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