धर्म
Parivartini Ekadashi Puja Rules: परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के आशीर्वाद और विवाह की बाधाओं को दूर करने के लिए आपको व्रत और पूजा करनी चाहिए. इससे जल्द विवाह के योग बनते हैं.
Parivartini Ekadashi Lord Vishnu Puja: आज 3 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा. यह परिवर्तिनी एकादशी का व्रत पद्मा एकादशी, जलझूलनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परिवरर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु जी करवट बदलते हैं. चातुर्मास के आरंभ में भगवान विष्णु शैया पर योगनिद्रा में चले जाते हैं जिसके बाद परिवर्तिनी एकादशी पर वह करवट बदलते हैं.
परिवर्तिनी एकादशी के शुभ अवसर पर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए. विष्णु भगवान के आशीर्वाद से रिश्तों और विवाह में स्थिरता आती है. जिन लोगों की शादी में बाधाएं आ रही है उन्हें इस व्रत को करने से शादी के योग बनते हैं. शीघ्र विवाह की प्रार्थना के लिए यह व्रत अत्यंत शुभ माना जाता है. इस व्रत में भगवान को पीले फूल अर्पित करें और नारियल में 11 बार मौली बांधकर भगवान के समक्ष रखें.
परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के साथ ही आपको भक्तिभाव से एकादशी की आरती का पाठ करना चाहिए. एकादशी माता की आरती के बिना एकादशी का व्रत अधूरा होता है. आपको इसका पाठ करना चाहिए. आप यहां से एकादशी माता की आरती पढ़ सकते हैं.
ओम जय एकादशी माता, मैया जय जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता ।। ओम जय एकादशी माता।।
तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी ।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी ।।ओम।।
मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई।। ओम।।
पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है,
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै ।। ओम ।।
नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै ।। ओम ।।
विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी,
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की ।। ओम ।।
चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली,
नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली ।। ओम ।।
शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी,
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी।। ओम ।।
योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी ।। ओम ।।
कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए।। ओम ।।
अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला।। ओम ।।
पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी ।। ओम ।।
देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती पार करो नैया ।। ओम ।।
परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्रय हरनी ।। ओम ।।
जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै।। ओम ।।
Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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