धर्म
हथेलियों में कई ऐसी रेखाएं हैं, जो सुख का संकेत देती हैं. वहीं कई रेखाएं ऐसी होती है, जो दुख और कष्ट प्रदान करती हैं. इन्हीं में से एक राहु की रेखा है.
जिस तरह से ज्योतिष में कुंडली देखकर व्यक्ति के स्वभाव से लेकर उसके भविष्य तक का पता लगाया जा सकता है. ठीक वैसे ही हाथों में मौजूद रेखाओं से जीवन में आने वाले सुख और दुखों का पता लगाया जा सकता है. हथेलियों में कई ऐसी रेखाएं हैं, जो सुख का संकेत देती हैं. वहीं कई रेखाएं ऐसी होती है, जो दुख और कष्ट प्रदान करती हैं. इन्हीं में से एक राहु की रेखा है. हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, हथेली में राहु की रेखा को चिंता रेखा कहा जाता है.
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, हथेली में मंगल क्षेत्र से निकलकर लाइफ लाइन और लक लाइन को क्रॉस कर निकालने वाली मस्तिष्क रेखा को छूने या फिर उसे काटकर हृदय रेखा तक जाने वाली रेखाओं को राहु रेखा कहा जाता है. हथेली में से 3 से 4 राहु रेखा हो सकती हैं. इन रेखाओं का स्पष्ट व मोटा होना भी अशुभ माना गया है. राहु की रेखाओं से जुड़े कुछ योग व्यक्ति के जीवन में परेशानियां खड़ी कर देते हैं.
अगर राहु रेखा जीवन रेखा को काटती है तो व्यक्ति का जीवन में पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. भाग्य रेखा को काटने पर जीवनसाथी के सेहत व व्यवसायिक उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है. राहु रेखा अगर मस्तिष्क रेखा को काटती है. व्यक्ति को धन हानि का सामना करना पड़ता है.
अगर जीवन व मस्तिष्क रेखा के पास से राहु रेखा निकल रही है तो इसे अशुभ माना गया है. इससे जीवन में उथल पुथल, रोग, मृत्यु व दुर्घटना की आशंका बढ़ने लगती है. ऐसे लोगों को राहु दोष की वजह से चोरी, बीमारी और दुर्घटना का सामना करना पड़ता है.
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, अगर मंगल पर्वत से दो राहु रेखाएं निकलकर एक साथ या शनि पर्वत के नीचे मस्तिष्क रेखा को टच करते हुए निकलती है तो ऐसे लोगों को मानसिक संतुलन अच्छा नहीं रहता है.
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