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Sankashti Chaturthi: किस दिन है संकष्टी चतुर्थी? जानिए गणपति भगवान की पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय

संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित है. मान्यता है कि इस दौरान विधि-विधान से पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं. जानिए जून महीने में कब है संकष्टी चतुर्थी.

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Sankashti Chaturthi: किस दिन है संकष्टी चतुर्थी? जानिए गणपति भगवान की पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय

संकष्टी चतुर्थी

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संकष्ट चतुर्थी का व्रत हर महीने के शुक्ल पक्ष को रखा जाता है. जून महीने में पड़ने वाली चतुर्थी तिथि को कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी कहते हैं. इस बार संकष्टी चतुर्थी के दिन 3 शुभ योग बन रहे हैं. इस दिन भगवान गणेश के भक्त व्रत रखते हैं. जानें कब है संकष्टी चतुर्थी, शुभ मुहूर्त, शुभ योग
 
संकष्टी चतुर्थी कब है?

पंचांग के अनुसार संकष्टी चतुर्थी तिथि शनिवार, 14 जून को दोपहर 3 बजकर 46 मिनट पर शुरू होगी. साथ ही यह तिथि रविवार, 15 जून को दोपहर 3 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी. उदयातिथि के अनुसार संकष्टी चतुर्थी का व्रत शनिवार, 14 जून को रखा जाएगा.

इस बार ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 2 मिनट से 4 बजकर 43 मिनट तक, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक, निशिता मुहूर्त मध्य रात्रि 12 बजकर 1 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा. पूजा का शुभ समय सुबह 7 बजकर 7 मिनट से 8 बजकर 52 मिनट तक है.
 
बन रहे 3 शुभ योग 

संकष्टी चतुर्थी के दिन 3 शुभ योग बन रहे हैं. इस बार ब्रह्म योग सुबह से दोपहर 1.13 बजे तक रहेगा. वहीं इंद्र योग दोपहर 1.13 बजे से रात 1.13 बजे तक रहेगा. साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग दोपहर 12.22 बजे से 15 जून की सुबह 5.23 बजे तक रहेगा. उसके बाद उत्तराषाढ़ा नक्षत्र 15 जून की रात 12.22 बजे तक रहेगा. उसके बाद श्रवण नक्षत्र शुरू हो जाएगा.

चंद्रोदय समय

संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रमा रात्रि 10:07 बजे उदय होता है. इस समय चंद्रमा की पूजा करनी चाहिए तथा उन्हें कच्चा दूध, सफेद फूल, साबुत चावल और जल डालकर अर्घ्य देना चाहिए. इसके बाद व्रत खोलना चाहिए.

संकष्टी चतुर्थी पर कैसे करें पूजा

संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर नहा धोकर साफ कपड़े पहनें. फिर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें. फिर हाथ में जल और फूल लेकर संकल्प लें. 'ॐ गं गणपतये नमः' और 'ॐ भालचंद्राय नमः' मंत्र का जाप करें. भगवान गणेश को दूर्वा लाल फूल, मोदक, तिल, फल, चंदन, धूपबत्ती, दीप आदि अर्पित करें. पूजा के बाद आरती करें और प्रसाद चढ़ाएं.

चतुर्थी का महत्व

मान्यता के अनुसार संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से जीवन में आने वाली सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं. साथ ही यह भी माना जाता है कि इस दिन अगर आप भगवान गणेश को दूर्वा, सिंदूर, मोदक, फल आदि अर्पित करते हैं तो आपको मनचाहा फल मिलता है.

Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है, जो लोक कथाओं और मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टी नहीं करता है)

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