धर्म
आषाढ़ पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा हिंदू धर्म में बहुत खास मानी गई है. इसी दिन महाभारत के रचयिता महर्षि वेद व्यास का जन्मदिन है. इस दिन इंद्र योग और वैद्य योग भी बन रहे हैं. तो चलिए जानें किस दिन आप अपने गुरु का वंदन करेंगे और किस दिन है गुरु पूर्णिमा?
आषाढ़ मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है. यह दिन जीवन में गुरु के महत्व को दर्शाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु पूर्णिमा पर अगर गुरु का आशीर्वाद प्राप्त हो जाए तो जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. इसके साथ ही इस दिन को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. क्योंकि कहा जाता है कि इसी दिन महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था. इस साल गुरु पूर्णिमा पर बहुत ही शुभ योग बन रहा है. इस योग में किया गया कोई भी शुभ कार्य सफल होगा. आइए जानते हैं इसके बारे में और जानकारी.
आषाढ़ पूर्णिमा या गुरु पूर्णिमा कब है?
हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान सही समय के अनुसार किए जाते हैं. इसी तरह यह जानना भी जरूरी है कि आषाढ़ पूर्णिमा या गुरु पूर्णिमा कब मनाई जाती है. ज्योतिषाचार्य आचार्य आनंद भारद्वाज ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल आषाढ़ पूर्णिमा 9 जुलाई और 10 जुलाई को सुबह 01:36 बजे शुरू होगी और अगले दिन यानी 10 जुलाई से 11 जुलाई के बीच 02:06 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के अनुसार गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई को मनाई जाएगी.
इंद्र योग कब है?
गुरु पूर्णिमा के दिन शुभ संयोग बनते हैं. इसलिए इस बार गुरु पूर्णिमा और भी खास होगी. क्योंकि इस दिन इंद्र योग बन रहा है. इंद्र योग सुबह से रात 9:38 बजे तक रहेगा. फिर वैद्य योग भी बनेगा. इसी तरह भद्र योग का भी कुछ असर रहेगा.
गुरु पूर्णिमा का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गुरु पूर्णिमा को महाभारत के रचयिता महर्षि वेद व्यास के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है. इसलिए इस दिन को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि इसी दिन वेद व्यास ने चारों वेदों का विभाजन किया था. हिंदू धर्म के सभी कर्मकांड वैदिक पद्धति के अनुसार किए जाते हैं. लोगों के हित के लिए महर्षि वेद व्यास ने वेदों को चार भागों में विभाजित किया, जिससे ज्ञान का प्रसार आसान हुआ. उनकी रचना महाभारत, जिसे पांचवें वेद के रूप में जाना जाता है, हर भारतीय को धर्म का मार्ग दिखाती है. इसलिए इस दिन गुरुओं द्वारा अपने शिष्यों को सही मार्ग दिखाने का रिवाज है. इसी तरह इस दिन सभी लोग अपने गुरु की पूजा करते हैं.
क्यों मनाई जाती हैं गुरु पूर्णिमा
गुरु पूर्णिमा, आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है, यह दिन गुरुओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है. इस दिन, शिष्य अपने गुरुओं की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. गुरु पूर्णिमा महर्षि वेद व्यास के जन्मदिन के रूप में भी मनाई जाती है, जिन्हें हिंदू धर्म में आदि गुरु माना जाता है.
(Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और लोक मान्यताओं पर आधारित है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें.)
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