धर्म
अपरा एकादशी एक महत्वपूर्ण वैष्णव एकादशी है जो हिंदू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आती है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत किया जाता है.
अपरा एकादशी का यह व्रत पापों का नाश करने और मोक्ष प्राप्ति के लिए किया जाता है. अपरा एकादशी का व्रत बहुत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से बड़े-बड़े पाप नष्ट हो जाते हैं. इस व्रत को करने से व्यक्ति को अपार धन, यश और सम्मान की प्राप्ति होती है. कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से ब्रह्महत्या, गोहत्या और ईशनिंदा जैसे पापों से मुक्ति मिलती है.
इस दिन भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा की जाती है. इस एकादशी की कथा सुनने और पढ़ने से एक हजार गायों के दान का पुण्य मिलता है.
अपरा एकादशी कब है?
पंचांग के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है. ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि शुक्रवार, 23 मई को प्रातः 1.12 बजे प्रारंभ होगी. यह तिथि 23 मई को रात्रि 10.29 बजे समाप्त होगी. उदयातिथि के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत 23 मई, शुक्रवार को रखा जाएगा.
अपरा एकादशी व्रत की पूजा विधि
दशमी तिथि की रात्रि में शुद्ध भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें. एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है. साफ़ कपड़े पहनें. पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. उन्हें पीले वस्त्र भेंट करें. चंदन, पुष्प, धूप, दीप जलाकर उनकी पूजा करें. तुलसी के पत्ते अवश्य चढ़ाएं. भगवान विष्णु को फल, मिठाई और तुलसी अर्पित करें.
भगवान विष्णु के मंत्रों जैसे "ओम नमो भगवते वासुदेवाय" का जाप करें. विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी होता है. अपरा एकादशी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें. भगवान विष्णु की आरती करें. अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों को कपड़े, भोजन या अन्य आवश्यक वस्तुएं दान करें. 12वें दिन सूर्योदय के बाद व्रत खोलें.
अपरा एकादशी का महत्व
अपरा एकादशी का व्रत बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है. गंगा स्नान, स्वर्ण दान, भूमि दान और गौ दान से भी पुण्य प्राप्त होता है. धन, धान्य, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. सम्मान और प्रसिद्धि बढ़ती है. मोक्ष का मार्ग खुल गया है. यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बहुत फलदायी माना जाता है.
Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है, जो लोक कथाओं और मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टी नहीं करता है)
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