Advertisement

घर में किन मूर्तियों को कभी नहीं रखना चाहिए? वरना बढ़ता रहेगा कलह, तनाव और आर्थिक दिक्कतें

घर का मंदिर केवल पूजा की जगह नहीं, बल्कि परिवार की मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है. हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसी मूर्तियों का जिक्र मिलता है, जिन्हें घर में रखना शुभ नहीं माना जाता. मान्यता है कि गलत प्रतिमाएं अनजाने में तनाव, कलह और आर्थिक रुकावट का कारण बनती हैं.

Latest News
घर में किन मूर्तियों को कभी नहीं रखना चाहिए? वरना बढ़ता रहेगा कलह, तनाव और आर्थिक दिक्कतें

Never, under any circumstances, keep these idols in your home.(Photo AI)

Add DNA as a Preferred Source

क्या आपके घर के मंदिर में रखी हर मूर्ति शुभ ही है? बहुत से लोग सजावट, श्रद्धा या ट्रेंड देखकर ऐसी प्रतिमाएं घर ले आते हैं, जिन्हें हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में घर के लिए उपयुक्त नहीं माना गया है. माना जाता है कि कुछ खास तरह की मूर्तियां घर की शांति, मानसिक संतुलन और आर्थिक स्थिति पर असर डाल सकती हैं.

दिलचस्प बात यह है कि कई बार लोग रोज पूजा भी करते हैं, लेकिन फिर भी घर में तनाव, बार-बार झगड़े या पैसों की रुकावट बनी रहती है. ज्योतिष और वास्तु विशेषज्ञ इसे केवल संयोग नहीं मानते, बल्कि पूजा स्थल की ऊर्जा और मूर्तियों के चयन से जोड़कर देखते हैं.

घर कौन से 9 प्लांट्स जरूर लगाने चाहिए? घर की विपत्ति टलेगी और सक्सेस और पैसों के खुलते जाएंगे दरवाजे

घर में क्यों नहीं रखी जाती उग्र रूप वाली मूर्तियां?

हिंदू धर्म में देवी-देवताओं के कई रूप बताए गए हैं. कुछ रूप शांत और कल्याणकारी माने जाते हैं, जबकि कुछ रूप युद्ध, विनाश या तांडव से जुड़े होते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार घर में मां काली की अत्यधिक उग्र मुद्रा, भगवान नृसिंह का क्रोधित रूप या तांडव करते भगवान शिव की बड़ी प्रतिमा रखने से घर का वातावरण भारी महसूस हो सकता है.

मान्यता है कि ऐसे रूप मंदिरों या विशेष साधना स्थलों के लिए अधिक उपयुक्त माने जाते हैं. घर में इनका प्रभाव मानसिक अशांति, चिड़चिड़ापन और पारिवारिक तनाव के रूप में देखा जाता है. हालांकि यह धार्मिक मान्यता और परंपरागत विश्वासों पर आधारित है.

किस पौधे में अगर फूल आ गए तो तिजोरियों में भरने लगता है पैसा? लेकिन सही दिशा जानना है जरूरी

खंडित मूर्तियां क्यों मानी जाती हैं अशुभ

कई घरों में पुरानी टूटी या हल्की दरार वाली मूर्तियां सालों तक रखी रहती हैं. कुछ लोग भावनात्मक लगाव के कारण उन्हें हटाना नहीं चाहते. लेकिन हिंदू धर्म में खंडित मूर्तियों की पूजा को उचित नहीं माना गया है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार टूटी प्रतिमा ऊर्जा के असंतुलन का प्रतीक मानी जाती है. माना जाता है कि इससे पूजा का सकारात्मक प्रभाव कम हो सकता है. इसलिए ऐसी मूर्तियों को सम्मानपूर्वक किसी पवित्र जल में विसर्जित करने या मंदिर में विधि अनुसार रखने की सलाह दी जाती है.

एक ही भगवान की कई मूर्तियां भी बन सकती हैं परेशानी

बहुत कम लोग जानते हैं कि घर के मंदिर में एक ही देवता की कई बड़ी मूर्तियां रखना भी उचित नहीं माना जाता. उदाहरण के लिए एक से ज्यादा शिवलिंग, कई गणेश प्रतिमाएं या सूर्य देव की अनेक तस्वीरें एक साथ रखने से पूजा स्थल में ऊर्जा का संतुलन बिगड़ने की बात कही जाती है.

विशेषज्ञ बताते हैं कि घर का मंदिर छोटा और संतुलित होना चाहिए. जरूरत से ज्यादा मूर्तियां रखने से पूजा नियमित रूप से करना भी मुश्किल हो जाता है और कई बार लोग अनजाने में उपेक्षा करने लगते हैं, जिसे धार्मिक दृष्टि से सही नहीं माना जाता.

महाभारत और युद्ध से जुड़ी तस्वीरें क्यों बचकर रखने की सलाह दी जाती है

आजकल कई लोग घर सजाने के लिए धार्मिक पेंटिंग्स और मूर्तियां खरीदते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र में महाभारत युद्ध, रोते हुए चेहरे, हिंसा या युद्ध दर्शाने वाली प्रतिमाओं और तस्वीरों को घर में लगाने से बचने की सलाह दी जाती है.

मान्यता है कि ऐसी छवियां घर के माहौल पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव डाल सकती हैं. लगातार तनावपूर्ण दृश्य देखने से अनजाने में नकारात्मकता और बेचैनी बढ़ सकती है. यही वजह है कि घर में शांत, सकारात्मक और सौम्य रूप वाली प्रतिमाएं अधिक शुभ मानी जाती हैं.

घर में कौन से 5 पौधे नहीं लगाने चाहिए? देखने में तो सुंदर, लेकिन दुर्भाग्य और गरीबी का बनते हैं कारण

सिर्फ श्रद्धा नहीं, सही देखभाल भी जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि मूर्ति केवल सजावट की वस्तु नहीं होती, बल्कि आस्था और अनुशासन का हिस्सा होती है. यदि घर में मंदिर बना है, तो उसकी नियमित सफाई, दीपक, पूजा और सम्मान भी उतना ही जरूरी है.

कई लोग फैशन या ट्रेंड के कारण बड़ी-बड़ी प्रतिमाएं तो घर ले आते हैं, लेकिन बाद में उनकी देखभाल नहीं कर पाते. धार्मिक मान्यताओं में इसे भी सही नहीं माना गया है. इसलिए घर में वही प्रतिमा रखनी चाहिए, जिसकी नियमित पूजा और सम्मान संभव हो.

घर का मंदिर छोटा हो सकता है, लेकिन वहां की सकारात्मकता पूरे परिवार के माहौल को प्रभावित करती है. यही वजह है कि वास्तु और धार्मिक परंपराओं में मूर्तियों के चयन को केवल आस्था नहीं, बल्कि मानसिक और पारिवारिक संतुलन से भी जोड़कर देखा जाता है.

अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगलफेसबुकx,   इंस्टाग्रामयूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.
 

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement