धर्म
जैन रामायण की मूल हस्तलिखित प्रति आरा के ऐतिहासिक जैन पुस्तकालय में सुरक्षित है. यह रामायण वाल्मीकि रामायण से बिलकुल अलग है. इस रामायण में हनुमान मानव रूप में हैं और रावण को गुणी दिखाया गया है.
आरा स्थित ऐतिहासिक जैन पुस्तकालय में जैन धर्म के सबसे पुराने ग्रंथों में से एक जैन रामायण की मूल हस्तलिखित प्रति मौजूद है. पुस्तकालय के सचिव प्रशांत जैन के अनुसार, यह पूरे भोजपुर और बिहार के लिए गर्व की बात है कि ऐसी दुर्लभ और ऐतिहासिक धरोहर यहां मौजूद है. यह जैन समुदाय के लिए अमूल्य धरोहर है, जिसे बहुत ही सुरक्षा और देखभाल के साथ रखा गया है.
दुनिया भर में रामायण के 300 से ज़्यादा संस्करण हैं, जिनमें से हर एक स्थानीय संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं से प्रभावित है. जैन रामायण का स्वरूप पारंपरिक वाल्मीकि रामायण से बहुत अलग है. इसमें भगवान राम के कई विवाह होते हैं और कहानियों का अंदाज़ भी बिल्कुल अलग और दिलचस्प है.
सचिव प्रशांत जैन बताते हैं कि जैन लाइब्रेरी का इतिहास बहुत पुराना है और जैन धर्म से जुड़ी कई दुर्लभ पांडुलिपियां और ग्रंथ यहां मौजूद हैं. जैन रामायण न केवल हस्तलिखित है, बल्कि इसमें मुगल शैली की हाथ से बनाई गई पेंटिंग भी हैं. इस रामायण में हनुमान को वानर के रूप में नहीं बल्कि मनुष्य के रूप में दर्शाया गया है.
यह पुस्तक करीब 30 साल पहले राष्ट्रीय अभिलेखागार द्वारा प्रकाशित की गई थी. इसकी मुद्रित प्रतियां आज भी जैन पुस्तकालय में उपलब्ध हैं, लेकिन मूल हस्तलिखित प्रति पुस्तकालय में ही सुरक्षित है.
जैन धर्म में इस रामायण को पउमचरियु कहा जाता है, जिसका अर्थ है पद्म चरित. माना जाता है कि प्राकृत में लिखी गई इस रामायण को विमलसूरी ने लिखा था, जिन्होंने जैन महाभारत भी लिखी थी. माना जाता है कि यह पुस्तक तीसरी या चौथी शताब्दी में लिखी गई थी.
इस रामायण में भगवान राम ने रावण का वध नहीं किया और न ही सीता को अग्नि परीक्षा देनी पड़ी. इसमें रावण को गुणवान और सुंदर दिखाया गया है. राम को वनवास भी किसी श्राप या दंड के कारण नहीं बल्कि भरत के मुनि बन जाने के भय से हुआ था, ताकि वह राज्य के मोह में न पड़ जाए.
देश-विदेश से जैन श्रद्धालु और इतिहास प्रेमी इस दुर्लभ जैन रामायण की एक झलक पाने के लिए आरा के जैन पुस्तकालय में आते हैं. यह न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक विरासत के रूप में भी बहुत महत्व रखता है.
(Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और लोक मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए इस खबर की पुष्टि नहीं करता है.)
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