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Mohini Avatar Story: भगवान विष्णु ने क्यों धारण किया था मोहिनी का रूप, जानें इसकी वजह

एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना के साथ ही व्रत किया जाता है. उनकी विधिपूर्वक पूजा की जाती है. वहीं वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोहिनी एकादशी कहा जाता है.

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Mohini Avatar Story: भगवान विष्णु ने क्यों धारण किया था मोहिनी का रूप, जानें इसकी वजह
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Mohini Avatar Facts: हिंदू धर्म की सभी तिथियों में एकदशी तिथि का बड़ा महत्व है. इनका अलग धार्मिक महत्व और पौराणिक कथा है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना के साथ ही व्रत किया जाता है. उनकी विधिपूर्वक पूजा की जाती है. वहीं वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोहिनी एकादशी कहा जाता है. इस बार मोहिनी एकादशी इस साल 8 मई 2025 को मनाई जाएगी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप क्यों धारण किया था. इसकी वजह क्या थी. आइए जानते हैं...

भगवान विष्णु ने क्यों लिया था मोहिनी अवतार 

धर्म ग्रंथों में मौजूद पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी देवताओं और राक्षसों ने अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन किया था. जैसे ही समुद्र मंथन में अमृत कलश की प्राप्ति हुई. भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार इसलिए लिया था. ताकि असुरों को अमृत पिलाने से रोका जा सके. इसके साथ ही देवताओं को अमृत पान कराया जा सके. समुद्र मंथन से अमृत मिलने के बाद असुरों और देवताओं में इसके लिए छिनाछपटी शुरू हो गई. देवताओं की रक्षा और अमृत को असुरों से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया था. .

मोहिनी रूप धारण कर असुरों को किया मोहित

दरअसल विष्णु भगवान ने मोहिनी रूप धारण कर असुरों को मोहित किया. इसके बाद मोहिनी यानी भगवान विष्णु ने देवताओं और असुरों को बारी-बारी से अमृत पान कराने के लिए तैयार किया. इसके बाद श्रीहरि ने सभी देवताओं को अमृत पान करा दिया. वहीं सभी राक्षस बिना अमृत के रह गये. इन्हीं में एक असुर ने छल से अमृत पान कर लिया. उस राक्षस के इस छल को सूर्य और चंद्र देव ने पहचान लिया और उन्होंने इसकी पूरी जानकारी भगवान विष्णु को दे दी.

दो ग्रहों के रूप बांट दिया असुर

जब भगवान विष्णु को असुर के अमृत पीने का पता चला तो उन्होंने अपना सुदर्शन चक्र चलाकर असुर का सिर और धड़ अलग कर दिया. अमृत पान की वजह से वह दैत्य मरा नहीं, लेकिन उसका सिर और धड़ हमेशा के लिए अमर हो गये. इसी के बाद यह दो ग्रहों में बट गया. इनमें एक राहु और दूसरा केतु है. 

इस लिए मनाई जाती है मोहिनी एकादशी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस तिथि पर श्रीहरि विष्णु ने मोहिनी स्वरूप धारण किया था. वह वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि थी. यही वजह है कि वैशाख की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है. इसी दिन पूजा अर्चना और दान कर पुण्यों की प्राप्ति की जाती है. 

Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.)

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