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Shiv Temple: गुजरात के इस मंदिर में प्रकृति खुद करती है शिवलिंग का जलाभिषेक, समुद्र में समाकर निकलता है मंदिर

यह मंदिर गुजरात में स्थित है. इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां हर दिन दो बार यानी सुबह और शाम के समय मंदिर गायब हो जाता है. इसके पीछे की वजह प्राकृतिक घटना है.

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Shiv Temple: गुजरात के इस मंदिर में प्रकृति खुद करती है शिवलिंग का जलाभिषेक, समुद्र में समाकर निकलता है मंदिर
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भारत में धरती से लेकर पहाड़ों तक पर देवी देवताओं के कई ऐसे मंदिर हैं, जो प्राचीन काल से बने हुए हैं. इन्में कई मंदिर देवों के देव महादेव को समर्पित हैं. ऐसा ही एक मंदिर श्रीस्तंभेश्वर महादेव का मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है. यह मंदिर गुजरात में स्थित है. इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां हर दिन दो बार यानी सुबह और शाम के समय मंदिर गायब हो जाता है. इसके पीछे की वजह प्राकृतिक घटना है. इतना ही नहीं, इन दोनों समय प्राकृति महादेव के शिवलिंग का जलाभिषेक करती है. आइए जानते हैं कहां और क्या है इस मंदिर की कहानी और विशेषता...

ऐसे सुबह और शाम को गायब हो जाता है यह मंदिर

जानकारी के अनुसार, गुजरात में स्थित यह मंदिर अरब सागर और खंभात की खाड़ी से घिरा हुआ है. इस मंदिर को श्री स्तंभेश्वर महादेव मंदिर कहा जाता है, जो 150 साल पुराना है. इसके चारों तरफ समुद्र है, जब भी समुद्र में उच्च ज्वार उठती है तो यह मंदिर पूरी तरह से समुद्र में डूब जाता है. ऐसा दिन के अलग अलग दो पहर में होता है. पहला सुबह और दूसरा शाम के समय होता है. इसके बाद जल स्तर खुद ही नीचे आ जाता है. इसके बाद मंदिर फिर से दिखाई देने लगता है. ऐसे में लोगों का दावा है कि मंदिर में समुद्र सुबह और शाम के समय शिवलिंग का जलाभिषेक करने आता है.  

ऐसे हुआ मंदिर का निर्माण

पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्री स्तंभेश्वर महादेव मंदिर में मौजूद शिवलिंग को भगवान शिव के बेटे भगवान कार्तिकेय ने स्थापित किया था. इस शिवलिंग को स्थापित करने के पीछे की वजह कार्तिकेय ने राक्षस तारकासुर का वध किया था. तारकासुर महादेव का भक्त था. इस कारण भगवान कार्तिकेय को अपराध बोध होने लगा. इसलिए भगवान विष्णु ने उन्हें शिवलिंग स्थापित करने और क्षमा प्रार्थना करने की सलाह दी थी. तब भगवान कार्तिकेय ने इस शिवलिंग की स्थापना की.

यह समय होता है दर्शन के लिए सबसे शुभ

श्री स्तंभेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन के लिए महादेव के भक्त दूर दूर से पहुंचते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा दर्शन का शुभ समय पूर्णिमा या पूर्णिमा की रात को होता है. क्योंकि इस समय समुद्र में ज्वार भाटा उत्पन्न होते हैं. साथ ही सावन के महीने में इस मंदिर में शिवलिंग के दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है. खासकर महा शिवरात्रि का समय भी इस मंदिर का दर्शन करने के लिए अच्छा माना गया है. भक्तों को अपनी यात्रा की योजना इस प्रकार बनानी चाहिए कि वे पूरे मंदिर को गायब होते और उसी दिन फिर से प्रकट होते देख सकें.

Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.)

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