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Mahakumbh Maghi Purnima Snan: महाकुंभ में स्नान के लिए क्यों सबसे श्रेष्ठ है माघ पूर्णिमा का दिन, जानें इस दिन स्नान का महत्व

महाकुंभ में 144 साल बाद खास संयोग बन रहे है, जिनमें स्नान करने से पुण्यों की प्राप्ति होती है. महाकुंभ में 6 शाही स्नान है. इनमें से पांचवां शाही स्नान माघ पूर्णिमा का है. 

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Mahakumbh Maghi Purnima Snan: महाकुंभ में स्नान के लिए क्यों सबसे श्रेष्ठ है माघ पूर्णिमा का दिन, जानें इस दिन स्नान का महत्व
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Mahakumbh 2025 Maghi Purnima Snan Importance: महाकुंभ दुनिया के सबसे बड़े और धार्मिंक आयोजनों में से एक है. 12 साल बाद प्रयागराज में लगने वाला महाकुंभ मेला साधु संतों और श्रद्धालुओं के लिए काफी खास है. वहीं महाकुंभ में 144 साल बाद खास संयोग बन रहे है, जिनमें स्नान करने से पुण्यों की प्राप्ति होती है. महाकुंभ में 6 शाही स्नान है. इनमें से पांचवां शाही स्नान माघ पूर्णिमा का है. इस दिन देश ही नहीं, विदेशों से भी लोग त्रिवेणी में स्नान और दान करने आते हैं. आइए जानते हैं. महाकुंभ में माघ पूर्णिमा के दिन स्नान और दान करने का क्या महत्व है. इस दिन त्रिवेणी में डुबकी लगाना क्यों श्रेष्ठ माना जाता है. 

महाकुंभ में स्नान के लिए इस लिए विशेष है माघ पूर्णिमा

महाकुंभ में पांचवां शाही स्नान माघ पूर्णिमा का है. इसमें करोड़ों की संख्या में लोग प्रयागराज में एकत्रित होकर त्रिवेणी संगम पर आस्था की डुबकी लगाकर मोक्ष प्राप्ति की कामना करेंगे. इसके साथ ही दान करने से पुण्यों की प्राप्ति करेंगे. यही वजह है कि माघ पूर्णिमा पर महाकुंभ में स्नान का महत्व बढ़ जाता है. पूर्णिमा तिथि पर वैसे तो स्नान-दान और व्रत का विशेष धार्मिक महत्व है, लेकिन इसे शाही स्नान में भी शामिल किया गया है. 

आइए जानते हैं क्यों किया जाता है शाही स्नान में शामिल

धार्मिक मान्यता है कि माघ पूर्णिमा पर देवी-देवता धरती पर आते हैं. देव मानव रूप में त्रिवेणी संगम में स्नान व जप-तप करते हैं. महाकुंभ में इसकी विशेषता और बढ़ जाता है. दुर्लभ योग में स्नान करने से देवताओं के समान पुसयों की प्राप्ति होती है. मनोकामना पूर्ति, मोक्ष प्राप्ति आदि के लिए भी माघ पूर्णिमा स्नान महत्वपूर्ण होता है. साथ ही पौष पूर्णिमा के दिन जो लोग कल्पवास की शुरुआत करते हैं. उनका माघ पूर्णिमा पर समापन होता है.

माघ पूर्णिमा 2025 का स्नान और दान 

ज्योतिष की मानें तो वैसे तो माघी पूर्णिमा पर किसी भी समय स्नान और दान किया जा सकता है. इसका अपना अलग महत्व है, लेकिन इसमें भी एक शुभ मुहूर्त है, जिसमें स्नान और दान करने से अधिक पुण्य फलों की प्राप्ति होती है. इनमें 12 फरवरी को सुबह 5 बजकर 19 मिनट से लेकर 6 बजकर 10 मिनट तक शुभ मुहूर्त है. इस समय में स्नान और दान करने के फल प्राप्त होंगे. साथ ही इस दिन गुड़, दाल, वस्त्र और फलों का दान करना चाहिए. 

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