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Mahabharat Facts: कौरवों के इस भाई ने महाभारत युद्ध में दिया था पांडवों का साथ, जानें इसका नाम

धृतराष्ट्र और गांधारी के 100 पुत्रों के अलावा एक और पुत्र था. इस पुत्र ने महाभारत युद्ध के शुरुआत के साथ ही कौरवों की सेना को छोड़कर पांडवों की सेना का साथ दिया. 

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Mahabharat Facts: कौरवों के इस भाई ने महाभारत युद्ध में दिया था पांडवों का साथ, जानें इसका नाम
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Mahabharat Facts: महाभारत का युद्ध द्वापर युग में कौरवों और पांडवों के बीच हुआ. इनमें कई मात्र ऐसे हैं, जिनके विषय में काफी कुछ लिखा गया है. वहीं कुछ पात्र ऐसे भी हैं, जिनके बारें में बेहद कम बताया गया है. इन्हीं में से एक कौरवों का भाई है, जो धृतराष्ट्र के पुत्र था, लेकिन महाभारत युद्ध में उसने अपने भाई कौरवों साथ देने की जगह पांडवों का साथ दिया. इतना ही नहीं, महाभारत युद्ध के बाद वही  कौरवों की तरफ से जिंदा रहा. आइए जानते हैं महाभारत के इस योद्धा के नाम से लेकर उसने क्यों नहीं दिया अपने भाईयों का साथ...

इस भाई ने नहीं दिया था कौरवों का साथ

धृतराष्ट्र और गांधारी के 100 पुत्रों के अलावा एक और पुत्र था, जिसका नाम युयुस्तु था. युयुस्तु बहुत बलशाली और ज्ञानी थी. उसके पिता धृतराष्ट्र थे, लेकिन मां गांधारी नहीं थी. वह दुर्योधन का प्रिय था, लेकिन महाभारत युद्ध में युयुत्सु ने कौरवों का साथ नहीं दिया.

कौन थी युयुस्तु की मां 

महाभारत के अनुसार, राजा धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी थी, जिससे 100 कौरवों का जन्म हुआ. वह महार्षि वेदव्यास के आशीर्वाद से गर्भवती थी. ये गर्भ लगभग 2 साल तक रहा. इसबीच धृतराष्ट्र की सेवा एक वैश्क स्त्री कर रही थी. राजा धृतराष्ट्र और उस वैश्य स्त्री से एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम युयुत्सु था. युयुत्सु गांधारी के 100 पुत्रों से अलग था, लेकिन धृतराष्ट्र का पुत्र होने की वजह से वह भी कौरवों का भाई और राजकुमार ही था.

युयुत्सु ने युद्ध में दिया पांडवों का साथ 

दरअसल महाभारत युद्ध के बीच एक क्षण ऐसा आया, जिसमें कौरवों और पांडवों की सेना आमने सामने आ गई. इसमें युधिष्ठिर ने कहा कि जो भी योद्धा पांडवों सेना निकलर आना चाहता है, वो आ सकता है और जो कौरवों की सेना पांडवों की सेना में जाना चाहता है. वह भी जा सकता है. इसी के बाद युयुत्सु कौरवों की सेना पांडवों की सेना में शामिल गये. युद्ध खत्म होने पर धृतराष्ट्र के सभी 100 पुत्र मर चुके थे, सिर्फ एक पुत्र युयुत्सु ही जीवित रहा.  

युद्ध के बाद युधिष्ठिर ने युयुत्सु को सौंपा ये काम

युद्ध के बाद धर्मराज युधिष्ठिर हस्तिनापुर के राजा बन गये. उन्होंने ने ही अपने चारों भाईयों को अलग अलग काम सौंपे. उसी समय युधिष्ठिर ने युयुत्सु को राजा धृतराष्ट्र की सेवा के लिए नियुक्त किया. महाभारत के महाप्रास्थानिक के अनुसार, जब पांडव स्वर्ग की यात्रा पर निकले. तब उन्होंने परीक्षित को हस्तिनापुर का राजा बनाया और युयुत्सु को संपूर्ण राज्य की देख-भाल करने की जिम्मेदारी सौंप दी.

Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.) 

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