धर्म
माघी पूर्णिमा को विशेष महत्व है. इस दिन स्नान और दान करने से व्यक्ति को विशेष पुण्यों की प्राप्ति होती है. भगवान प्रसन्न होकर व्यक्ति को कष्ट और संकटों को नष्ट कर जीवन में सफलता प्रदान करते हैं.
हिंदू धर्म में माघ पूर्णिमा का विशेष महत्व है. इसे माघी पूर्णिमा और महा माघी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व होता है. यह महाकुंभ में शाही स्नान का सबसे शुभ समय है, जिसमें लाखों लोग प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में स्नान करने के साथ दान करेंगे. मान्यता है कि इस दिन स्नान करने के साथ-साथ दान करने से 31 गुना अधिक पुण्यों की प्राप्ति होती है. वहीं इस बार माघी पूर्णिमा पर कई ऐसे योग बन रहे हैं, जो इसकी महत्वता को और बढ़ाते हैं. आइए जानते हैं माघ पूर्णिमा पर बन रहे ये दुर्लभ योग, शुभ मुहूर्त से लेकर पूजा विधि और मंत्र...
माघ पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 11 फरवरी 2025 की शाम 6 बजकर 55 मिनट से शुरू होगी. यह अगले दिन 12 फरवरी शाम 7 बजकर 22 मिनट तक रहेगी. ऐसे में उदयातिथि को देखते हुए माघ पूर्णिमा 12 फरवरी 2025 को मनाई जाएगी. इस दिन शुभ मुहूर्त में स्नान और दान करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होगी.
यह है स्नान और दान का शुभ समय
ज्योतिष की मानें तो वैसे तो माघी पूर्णिमा पर किसी भी समय स्नान और दान किया जा सकता है. इसका अपना अलग महत्व है, लेकिन इसमें भी एक शुभ मुहूर्त है, जिसमें स्नान और दान करने से अधिक पुण्य फलों की प्राप्ति होती है. इनमें 12 फरवरी को सुबह 5 बजकर 19 मिनट से लेकर 6 बजकर 10 मिनट तक शुभ मुहूर्त है. इस समय में स्नान और दान करने के फल प्राप्त होंगे.
माघ पूर्णिमा 2024 पूजा विधि
माघ पूर्णिमा विशेष महत्व है. इस दिन सुबह उठते ही स्नान के बाद मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करें. महादेव को जल अर्पित करने के साथ ही चंद्रमा को अर्घ्य दें. अगर आप किसी वजह से पवित्र नदी में स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो घर में नहाने के पानी में थोड़ा सा जल डाल लें. इसके बाद एक तांबे के लोटे में जल, सिंदूर, अक्षत, लाल फूल आदि डालकर सूर्य देव का अर्घ्य दें. अर्घ्य देते समय ‘ऊँ सूर्याय नम:’ मंत्र का जाप करें. साथ ही अपनी क्षमता अनुसान दान जरूर करें.
माघ पूर्णिमा पर करें इन मंत्रों का जप
श्री विष्णु मंत्र
ॐ नमोः नारायणाय..
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय..
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि.
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्..
मां लक्ष्मी मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः..
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद.
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:..
श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि,
तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ..
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