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Lord Shiva Puja: भगवान शिव और शिवलिंग पर गलती से भी अर्पित न करें ये 9 चीजें, नाराज हो जाएंगे महादेव

महादेव की पूजा अर्चना में भक्त शिवलिंग पर बेल पत्र, धतूरा और दूध जैसी कई चीज़ें चढ़ाते हैं. हालांकि, कुछ ऐसे प्रसाद हैं जिन्हें भगवान शिव की पूजा करते समय अनुचित या वर्जित माना जाता है.

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Lord Shiva Puja: भगवान शिव और शिवलिंग पर गलती से भी अर्पित न करें ये 9 चीजें, नाराज हो जाएंगे महादेव
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Lord Shiva Puja: सावन के महीने की शुरुआत होने वाली है. इस माह को भगवान शिव और मां पार्वती का माना जाता है. जो भी व्यक्ति सावन के सोमवार व्रत और भगवान शिव की आराधना करता है. उसकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है. शिव की पूजा करने से सौभाग्य, वित्तीय स्थिरता, मनचाहा जीवनसाथी और नौकरी मिलती है. महादेव की पूजा अर्चना में भक्त शिवलिंग पर बेल पत्र, धतूरा और दूध जैसी कई चीज़ें चढ़ाते हैं. हालांकि, कुछ ऐसे प्रसाद हैं जिन्हें भगवान शिव की पूजा करते समय अनुचित या वर्जित माना जाता है. गलती से भी इन 9 चीजों को महादेव की पूजा अर्चना में नहीं रखना चाहिए. 

तुलसी के पत्ते

पौराणिक कथाओं के अनुसार, तुलसी वृंदा नामक राक्षस राजा जलंधर की एक समर्पित पत्नी थी और भगवान शिव ने उसका वध कर दिया था. दुःख में, वृंदा ने भगवान शिव को श्राप दिया और तुलसी के पौधे के रूप में पुनर्जन्म लिया. साथ ही, तुलसी भगवान विष्णु की पत्नी देवी लक्ष्मी का एक रूप है, इसलिए इसे भगवान शिव को नहीं चढ़ाना चाहिए.

कुमकुम या सिंदूर

भगवान शिव को नहीं चढ़ाया जाता क्योंकि यह वैवाहिक स्थिति से जुड़ा हुआ है, जबकि भगवान शिव वैराग्य का प्रतीक हैं.

फूल

जैसे केतकी, कनेर, कमल, चंपा, केवड़ा, दुपहरि, गुड़हल, मालती, चमेली, कुंद, जूही आदि फूल भगवान शिव को नहीं चढ़ाए जाते.

नारियल

नारियल को "श्रीफल" माना जाता है और यह देवी लक्ष्मी का प्रतीक है. इसलिए इसे भगवान शिव को नहीं चढ़ाना चाहिए.

टूटे हुए चावल

टूटे हुए चावल को अशुभ माना जाता है और इसे भगवान शिव को नहीं चढ़ाना चाहिए.

लाल चंदन

भगवान शिव को लाल चंदन का चूर्ण नहीं चढ़ाया जाता है. केवल सफेद या पीले चंदन का लेप ही स्वीकार्य है.

तिल

भगवान शिव को तिल चढ़ाना भी वर्जित है क्योंकि तिल को भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न माना जाता है.

शंख से जल

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से 'शंखचूड़' नामक राक्षस का वध किया था और उसका शरीर जलकर राख हो गया था. उसके शरीर की राख से ही शंख की उत्पत्ति हुई थी. इसलिए भगवान शिव को शंख से जल नहीं चढ़ाया जाता.

हल्दी

हल्दी समृद्धि का प्रतिनिधित्व करती है और इसमें शीतलता प्रदान करने वाले गुण नहीं होते. इसलिए इसका उपयोग भगवान शिव की पूजा में नहीं किया जाता है.

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